बुधवार, 24 जून 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

राम मंदिर दान में 200 किलो चांदी के गबन का आरोप? SIT ने योगी सरकार को सौंपी जांच रिपोर्ट

अयोध्या राम मंदिर के लिए दान में दी गई 200 किलो चांदी के गबन के आरोपों की जांच कर रही SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट यूपी सरकार को सौंप दी है। एक कारोबारी ने 2021 में करोड़ों की चांदी दान करने के बाद रसीद न मिलने की शिकायत की थी, जिसके बाद सरकार ने जांच के आदेश दिए थे।

राम मंदिर दान में 200 किलो चांदी के गबन का आरोप? SIT ने योगी सरकार को सौंपी जांच रिपोर्ट
AI जनित प्रतीकात्मक चित्र

मुख्य बिंदु

लखनऊ/अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए करोड़ों रुपये के दान में कथित हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने सियासी पारे को गरमा दिया है। सिंधी समुदाय की ओर से दान की गईं 200 किलोग्राम चांदी की ईंटों के गबन के आरोपों के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मंगलवार, 24 जून 2026 को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है, जिसके बाद खलबली मची हुई है। यह शिकायत कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन डॉ. राजू वी. मनवानी ने की थी, जिन्होंने दान की कोई रसीद न मिलने का दावा किया है।

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क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला 26 जनवरी 2021 का है, जब अयोध्या में डॉ. राजू वी. मनवानी ने पूरे सिंधी समुदाय की तरफ से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय को 200 चांदी की ईंटें सौंपी थीं। हर ईंट का वजन एक किलोग्राम था। शिकायतकर्ता के मुताबिक, उस समय इस चांदी का मूल्य लगभग 1.5 से 2 करोड़ रुपये के बीच था, जबकि आज इसकी कीमत बढ़कर 6 से 7 करोड़ रुपये आंकी जा रही है। डॉ. मनवानी का आरोप है कि इतना बड़ा दान देने के बावजूद उन्हें कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई। उन्होंने बताया, "दान देने के समय मंदिर से जुड़े लोगों ने कहा कि वे पहले पड़ताल करेंगे और तय करेंगे कि इसका इस्तेमाल कहां और कैसे करना है।" इसी के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि के संभावित गबन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

सरकार का एक्शन और SIT की गोपनीय जांच

जब यह मामला उच्च स्तर पर पहुंचा तो योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पर तत्काल संज्ञान लिया। 13 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया। इस टीम का नेतृत्व लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत को सौंपा गया। टीम ने तेजी से अपनी जांच शुरू की और महज कुछ ही दिनों में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार कर ली।

मंगलवार, 24 जून 2026 को एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंप दी है। हालांकि, जांच के नतीजों को लेकर अभी पर्दा नहीं उठाया गया है। एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह एक गोपनीय जांच है और गबन से संबंधित कोई भी विवरण साझा करने के लिए वे अभी अधिकृत नहीं हैं। उनके इस बयान से मामले की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दानदाता ने उठाए सवाल, बोले- दोषियों को मिले सजा

इस पूरे मामले पर शिकायतकर्ता डॉ. राजू वी. मनवानी ने लेह, लद्दाख से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके द्वारा दिए गए चंदे का क्या हुआ। उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "अगर चांदी का इस्तेमाल मंदिर के लिए नहीं हुआ, तो यह बहुत दुखद है और इसका भविष्य के दानदाताओं पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा।" उन्होंने जोर देकर कहा कि इस मामले में जो भी दोषी हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए ताकि लोगों का विश्वास बना रहे। उनके इस बयान ने ट्रस्ट के प्रबंधन पर दबाव और बढ़ा दिया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की फाइनल रिपोर्ट और उस पर होने वाली सरकारी कार्रवाई पर टिकी हैं।

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News4Social यूपी डेस्क

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