बुधवार, 5 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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E20 पेट्रोल विवाद: नितिन गडकरी को मिला मानहानि का केस करने का अधिकार, 11 करोड़ का मांगा हर्जाना

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चल रहे एक अभियान को लेकर बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें डीपफेक वीडियो और भ्रामक पोस्ट के जरिए उनकी छवि खराब करने वालों के…

E20 पेट्रोल विवाद: नितिन गडकरी को मिला मानहानि का केस करने का अधिकार, 11 करोड़ का मांगा हर्जाना
(फोटो: IANS)

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ चल रहे एक अभियान को लेकर बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें डीपफेक वीडियो और भ्रामक पोस्ट के जरिए उनकी छवि खराब करने वालों के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में मेटा (फेसबुक), एक्स (पूर्व में ट्विटर) और गूगल जैसी कंपनियों के साथ-साथ अज्ञात सोशल मीडिया यूजर्स पर भी कार्रवाई की जा सकेगी।

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यह मामला सरकार की E20 पेट्रोल नीति से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर AI की मदद से बनाए गए कुछ वीडियो और पोस्ट प्रसारित किए जा रहे थे, जिनमें दावा किया गया था कि इस नीति से नितिन गडकरी और उनके परिवार को व्यक्तिगत रूप से वित्तीय लाभ हो रहा है।

क्या है पूरा विवाद?

गडकरी ने अदालत में अपनी याचिका में स्पष्ट किया कि इथेनॉल मिश्रण का कार्यक्रम पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन आता है, न कि उनके सड़क परिवहन मंत्रालय के। उन्होंने दलील दी कि उन्हें और उनके परिवार को इस नीति से जोड़कर बदनाम करने की एक संगठित कोशिश की जा रही है। अपनी याचिका में केंद्रीय मंत्री ने दो प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, सभी प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री को तत्काल हटाया जाए। दूसरी, उनकी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के एवज में 11 करोड़ रुपये का हर्जाना दिलाया जाए।

मुकदमे का उद्देश्य और अदालत का फैसला

गडकरी के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि इस कानूनी कार्रवाई का मकसद आम लोगों की राय या चर्चा को दबाना बिल्कुल नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर फैलाई जा रही फर्जी और अपमानजनक सामग्री के लिए जवाबदेह बनाना है। इन दलीलों को सुनने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने केंद्रीय मंत्री को मुकदमा दायर करने की इजाजत दे दी।

यहां यह जानना जरूरी है कि E20 पेट्रोल का मतलब ऐसे पेट्रोल से है जिसमें 20 फीसदी इथेनॉल मिलाया गया हो। सरकार का तर्क है कि इससे कार्बन उत्सर्जन और कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता दोनों कम होगी। हालांकि, इस नीति पर बहस भी जारी है, जिसमें कुछ लोग वाहनों के इंजन पर इसके असर और माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक की संभावित गिरावट को लेकर चिंता जता रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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