पोलियो के टीके की खोज किसने और कब की थी ?
वर्तमान समय में हमें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
वर्तमान समय में हमें कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जिनमें से काफी का वैज्ञानिकों ने इलाज ढूंढ लिया तथा कुछ का इलाज ढूंढने के लिए प्रयासरत है. इनमें से काफी बीमारियां ऐसी भी हैं, जो वर्तमान समय में तो हमें ज्यादा प्रभावित नहीं करती हैं. लेकिन जब ये पहली बार पहचान में आई तब इनका मानव जाति पर बहुत ही नकारात्मक प्रभाव पड़ा. इसी कारण लोगों के मन में बीमारियों के इतिहास से संबंधित कई तरह के सवाल पैदा होते हैं. इसी तरह का एक सवाल जो आमतौर पर लोगों के मन में आता है कि पोलियो के टीके की खोज किसने और कब की थी ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

पोलिया बीमारी क्या है-
अगर हम पोलियो के टीके के इतिहास की बात कर रहें हैं, तो ऐसे में हमारे लिए यह जानना आवश्यक हो जाता है कि ये पोलियो की बीमारी होती क्या है. यह मानव शरीर पर क्या प्रभाव डालती है तथा इसके पीछे क्या कारण हैं. पोलियों एक संक्रामक रोग होता है. इस बीमारी के विषाणु मुख्यत छोटे बच्चों पर अपना असर दिखाते हैं. जब पोलियों का वायरस हमारे शरीर में जाता है, तो इसकी वजह से हमारे शरीर का कोई भी अंग कमजोर हो जाता है या हम कहें कि एक तरह से लकवे की स्थिति हो जाती है. यह शरीर के उस अंग को जिंदगी भर के लिए कमजोर कर सकता है. उसका कोई उपचार नहीं है. यह एक लाइलाज बीमारी है. लेकिन अगर इसका समय से बचाव करें, तो हम इस बीमारी से बच सकते हैं. बचाव ही इस बीमारी का इलाज होता है.

पोलियों के टीके की खोज किसने और कब की थी-
अगर पोलियों के टीके की खोज की बात करें, तो इसकी खोज 1955 में की गई थी. इसकी खोज जोनास साल्क की टीम ने ने की थी. अगर पोलियों से संक्रमित मामलों की बात करें, तो यह 1980 में देखे गए थे. इस बीमारी से बचने के लिए बचाव बहुत महत्वपूर्ण होता है. इसी कारण लोगों में जागरूकता लाने के लिए विश्व पोलियो दिवस मनाने की शुरुआत रोटरी इंटरनेशनल ने की. प्रत्येक वर्ष 24 अक्टूबर को विश्व पोलियो दिवन मनाया जाता है. इसके पीछे का कारण यह है कि जोनास साल्क का जन्म 24 अक्टूबर को हुआ था.
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पोलियो से बचाव के लिए सरकार की तरफ से भी कार्यक्रम चलाए जाते हैं. इसमें 5 साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त में पोलियों की दवा पिलाई जाती है. इसके साथ ही हमारे देश के लिए बहुत खुशी की बात है कि 2012 में भारत पोलियो मुक्त देश की लिस्ट में शामिल हो चुका है. वहीं अगर भारत में पोलियों की शुरूआत 1995 में हुई थी.
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