बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, कुल मौतें 844 तक पहुँचीं, विशेषज्ञ टीकाकरण कवरेज पर उठा रहे सवाल
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार सुबह 8 बजे तक समाप्त हुए 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण चार और बच्चों की जान चली गई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन नई…
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार सुबह 8 बजे तक समाप्त हुए 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों के कारण चार और बच्चों की जान चली गई। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इन नई मौतों के साथ इस साल बीमारी से जुड़ी कुल पुष्ट और संदिग्ध मौतों का आँकड़ा 844 तक पहुँच गया है, जो संकट की गंभीरता को दर्शाता है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में हुई सभी चार मौतें संदिग्ध खसरा मामलों की श्रेणी में दर्ज की गई हैं। इसके चलते खसरे जैसे लक्षणों से होने वाली कुल मौतों की संख्या 748 हो गई है, जबकि प्रयोगशाला में पुष्टि के बाद हुई मौतों का आँकड़ा 96 पर स्थिर है।
संक्रमण के नए मामले और अस्पताल की स्थिति
चिंता की बात यह है कि संक्रमण के नए मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं। इसी 24 घंटे की अवधि में, देश भर से 1,022 नए संदिग्ध मामले सामने आए, जिससे इस साल कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 1,30,083 हो गई। वहीं, लैब जाँच में 115 नए मामलों की पुष्टि हुई, जिससे कुल पुष्ट संक्रमितों की संख्या 16,295 पर पहुँच गई है।
डीजीएचएस के आँकड़ों से पता चलता है कि 15 मार्च 2026 से अब तक 1,12,620 संदिग्ध खसरा रोगियों को अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। इनमें से 1,08,283 मरीज इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं, जबकि बाकी का इलाज जारी है। स्वास्थ्य अधिकारी संक्रमण को रोकने के लिए निगरानी, परीक्षण और टीकाकरण अभियान तेज करने की बात कह रहे हैं।
टीकाकरण कवरेज पर विशेषज्ञ चिंता
ढाका ट्रिब्यून की एक हालिया रिपोर्ट ने इस प्रकोप के पीछे के कारणों पर प्रकाश डाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश कभी भी खसरा युक्त टीके की दोनों खुराकों के लिए 95% का वह कवरेज स्तर हासिल नहीं कर पाया, जो प्रकोप को रोकने के लिए आवश्यक माना जाता है। चिंताजनक रूप से, 2025 में यह कवरेज घटकर लगभग 57% रह गया था।
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए सटीक डेटा महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि जहाँ सरकारी प्रशासनिक आँकड़े हमेशा 100% से अधिक टीकाकरण कवरेज दिखाते रहे, वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ के अनुमानों के अनुसार यह 2010 से लगातार 93 से 96 प्रतिशत के बीच ही रहा। रिपोर्ट में कहा गया है, "इन आँकड़ों में अंतर पहले से ही एक चेतावनी संकेत था, लेकिन हम समय रहते इसे पहचानने और संभावित संकट का अनुमान लगाने में विफल रहे।"
इनपुट: IANS



