सवाल 132- द्रौपदी के ऐसे कौन से राज हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं?

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MAHABHARAT
सवाल 132- द्रौपदी के ऐसे कौन से राज हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं?

वैसे तो द्रौपदी से जुड़े बहुत से ऐसे राज है जो शायद ही बहुत कम लोग जानते है, कितना अविश्वसनीय लगता है सीता, द्रौपदी, मकरध्वज आदि के जन्मों के बारें में जानकर की इनका जन्म धरती, अग्नि और मछली के माध्यम से हुई था, जो बिल्कुल भी वैज्ञानिक और वास्तविक प्रतीत नहीं होता है. हम यहां पर बात कर रहें है. द्रौपदी की जो एक युवा कन्या के रूप में आग्निवेदी से प्रकट हुई थी, ऐसा कहा जाता है कि द्रुपद ने द्रौपदी को कुरु वंश के नाश के लिए उत्पन्न करवाया था. राजा द्रुपद द्रोणाचार्य को आश्रय देने वाले कुरु वंश से बदला लेना चाहते थे.

द्रुपद ने करवाया अद्भुत यज्ञ
जब पांडव और कौरवों ने अपनी शिक्षा पूरी की, तो द्रोणाचार्य ने उनसे एक गुरुदक्षिणा मांगी. द्रोणाचार्य ने वर्षों पूर्व द्रुपद से हुए अपने अपमान का बदला लेने के लिए पांडवो और कौरवों से कहा कि पांचाल नरेश द्रुपद को बंदी बनाकर मेरे समक्ष लाओ. पहले कौरवों ने आक्रमण किया परंतु वो हारने लगे. यह देख पांडवो ने आक्रमण किया और द्रुपद को बंदी बना लिया. द्रोणाचार्य ने द्रुपद का आधा राज्य ले लिया और आधा उन्हें वापस करके छोड़ दिया. द्रुपद ने इस अपमान और राज्य के विभाजन का बदला लेने के लिए ही वह अद्भुत यज्ञ करवाया, जिसमें द्रौपदी और धृष्टद्युम्न पैदा हुए थे.

शिव से मांगा वरदान
द्रौपदी को पंचकन्या में एक माना जाता है. पंचकन्या यानि ऐसी पांच स्त्रियां जिन्हें कन्या अर्थात कुंवारी होने का आशीर्वाद प्राप्त था. पंचकन्या अपनी इच्छा से कौमार्य पुनः प्राप्त कर सकती थीं. यह सभी जानते है कि द्रौपदी के पांच पति थे, लेकिन वह अधिकतम 14 पतियों की पत्नी भी बन सकती थी. द्रौपदी के पांच पति होना नियति ने काफी समयपूर्व ही निर्धारित कर दिया था. इसका कारण द्रौपदी के पूर्वजन्म में छिपा था, जिसे भगवान कृष्ण ने सबको बताया था. पूर्वजन्म में द्रौपदी राजा नल और उनकी पत्नी दमयंती की पुत्री थीं. उस जन्म में द्रौपदी का नाम नलयनी था. नलयनी ने भगवान शिव से आशीर्वाद पाने के लिए कड़ी तपस्या की.

भगवान शिव प्रसन्न होकर नलयनी को आशीर्वाद दिया कि अगले जन्म में उसे 14 इच्छित गुणों वाला पति मिले. परंतु उन्होंने साथ ही यह भी कहा की 14 गुणों का एक व्यक्ति में होना असम्भव है. जब नलयनी अपनी जिद पर अड़ी रही तो भगवान शिव ने उसकी इच्छा पूर्ण होने का आशीर्वाद दे दिया. इस अनूठे आशीर्वाद में अधिकतम 14 पति होना और प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद पुनः कुंवारी होना भी शामिल था. यही कारण था कि द्रौपदी पंचकन्या के नाम से भी जानी जाती है.

द्रौपदी के पुत्रों के नाम
पांचो पांडवों से द्रौपदी के पांच पुत्र हुए थे. युधिष्ठिर से हुए पुत्र का नाम प्रतिविंध्य, भीम से सुतसोम, अर्जुन से श्रुतकर्म, नकुल से शतनिक, सहदेव से श्रुतसेन नामक पुत्र हुए। ये सभी पुत्र अश्वत्थामा के हाथों सोते समय मारे गए. द्रौपदी के भाई धृष्टद्युम्न तथा शिखंडी का वध भी अश्वत्थामा ने ही किया था.

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चिरहरण के दो कौरव भाइयों ने किया विरोध
द्रौपदी चीर हरण के समय दो कौरव ऐसे भी थे, जिन्होंने इसका विरोध किया था. युयुत्सु और विकर्ण नामक दो कौरव भाइयों ने सभा में द्रौपदी की प्रार्थना का समर्थन किया था. युयुत्सु सबसे बुद्धिमान कौरव माने जाते थे. वे मन ही मन पांडवो और द्रौपदी से प्रभावित थे.