बुखार की सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवा कौन सी है ?
आयुर्वेद में बुखार के इलाज के लिए सुदर्शनवटी, त्रिभुवकिर्तीकी जैसी दवाएं और तुलसी, गुडची, नागरमोथा जैसी जड़ी-बूटियां प्रयोग की जाती हैं। गीले कपड़े से पोंछना, पानी का अधिक सेवन और तुलसी की चाय भी बुखार कम करने में मददगार माने जाते हैं।
वर्तमान समय में हमें स्वास्थ्य संबंधित कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. जिसके लिए वैसे तो बाजार में कई तरह की दवाएं उपलब्ध होती हैं. लेकिन अभी देखने को मिल रहा है कि लोगों का भरोसा आयुर्वेदिक दवाओं की तरफ लगातार बढ़ रहा है. इसी कारण आयुर्वेदिक दवाओं से संबंधित लोगों के मन में कई तरह के सवाल होते हैं. इसी तरह का एक सवाल है कि बुखार की सबसे अच्छी आयु्वेदिक दवा कौन सी है. अगर आपके मन में भी ऐसी ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

बुखार क्या होता है-
आमतौर पर आपने बुखार काफी बार सुना होगा. अगर बुखार को साधारण शब्दों में कहे, तो उसमें हमारे शरीर का तापमान बढ़ जाता है. इसके अलावा हम यह भी कह सकते हैं कि बुखार खुद एक बीमारी नहीं होती है, बल्कि किसी दूसरी बीमारी का लक्षण होता है. जब बुखार के लिए दवा ली जाती है, तो इस बात का ध्यान रखना अति आवश्यक है कि इस बुखार के पीछे का कारण क्या है तथा उसका इलाज करना बहुत जरूरी हो जाता है. काफी बार आपने देखा होगा कि कभी कभी अत्यधिक चोट के द्रर्द से भी हमें बुखार हो जाता है.

बुखार का इलाज-
जब भी हम बुखार के इलाज की बात करते हैं, तो यह ध्यान देना जरूरी है कि इसके पीछे क्या कारण है. बुखार कम करने के लिए गीले कपड़े से बदन को पूछना एक बहुत ही कारगर तरीका या घरेलू उपचार होता है. इससे वाष्प होकर शरीर की गर्मी बाहर निकल जाती है तथा बुखार कम हो जाता है. आयुर्वेद के अनुसार सुदर्शनवटी या त्रिभुवकिर्तीकी २-२ गोली दिन में २-३ बार ले सकते है. बुखार में पानी और द्रव्य पदार्थ का अधिक प्रयोग करना चाहिएं. तुलसी की चाय भी बुखार में बहुत लाभदायक होती है. आयुर्वेद में वैसे तो बुखार के लिए बहुत सारी जड़ी बूटियॉं इस्तेमाल की जाती हैं. लेकिन मुख्य की बात करें, तो उसमें तुलसी, गुडची, नागरमोथा, खस और एलोए इत्यादी का नाम आता है.
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यहाँ हमारे लिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि बुखार के पीछे कई कारण हो सकते हैं. इसलिए अगर घरेलू उपचार करने पर आपको आराम नहीं मिलता है, तो तुरंत आपको डॅाक्टर या विशेषज्ञय से संपर्क करना चाहिए. इसके अलावा कुछ गंभीर लक्षण भी होते हैं. जैसे कि एक सप्ताह से अधिक समय तक बुखार रहना , बुखार के साथ साथ तेजी से सांस चलना , जोड़ों में दर्द या सूजन होना , त्वचा या आँखों पर पीलापन दिखाई देना इत्यादी.
Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।
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