गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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नितिन गडकरी के डीपफेक वीडियो पर कोर्ट का सख़्त रुख, मेटा-एक्स से अपलोड करने वालों की जानकारी मांगी

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े एक डीपफेक वीडियो मामले में मुंबई की एक अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़ी फटकार लगाई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कोर्ट ने E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी…

नितिन गडकरी के डीपफेक वीडियो पर कोर्ट का सख़्त रुख, मेटा-एक्स से अपलोड करने वालों की जानकारी मांगी
(फोटो: IANS)

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से जुड़े एक डीपफेक वीडियो मामले में मुंबई की एक अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कड़ी फटकार लगाई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, कोर्ट ने E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर बने इस भ्रामक वीडियो को प्रथम दृष्टया मानहानिजनक माना है। साथ ही, मेटा और एक्स कॉर्प को इसे तुरंत हटाने और इसे अपलोड करने वाले यूजर्स की जानकारी देने का निर्देश दिया है।

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यह पूरा मामला केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा दायर एक मानहानि के मुकदमे से जुड़ा है, जिस पर जस्टिस आरिफ के सामने सुनवाई हुई। गडकरी के वकील संदीप एस. लड्डा ने बताया कि अदालत में E20 पॉलिसी से संबंधित भ्रामक वीडियो और पोस्ट सबूत के तौर पर पेश किए गए।

अदालत की प्लेटफॉर्म्स को फटकार

अदालत में पेश तस्वीरों और कंटेंट की जांच के बाद जस्टिस आरिफ ने मेटा (जो फेसबुक और इंस्टाग्राम का संचालन करती है) और एक्स कॉर्प (पूर्व में ट्विटर) का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों से सवाल किया कि इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री उनके प्लेटफॉर्म पर कैसे बनी रह सकती है।

वकील संदीप लड्डा के मुताबिक, कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि ऐसे मुद्दों से निपटने के लिए प्लेटफॉर्म्स के पास कोई प्रभावी प्रणाली क्यों नहीं है। गडकरी के पक्ष ने दलील दी कि लोगों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया का दुरुपयोग बहुत आसानी से किया जा रहा है, लेकिन इसे रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था मौजूद नहीं है।

कोर्ट के प्रमुख निर्देश

सुनवाई के बाद अदालत ने E20 से जुड़े कंटेंट को डीपफेक और मानहानिपूर्ण मानते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। कोर्ट ने प्लेटफॉर्म्स को आदेश दिया कि वे उन सभी लोगों की जानकारी दें जिन्होंने यह कंटेंट अपलोड किया था। इसके अलावा, सभी संबंधित पोस्ट को तत्काल हटाने का आदेश दिया गया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमा दायर होने के बाद अपलोड की गई किसी भी ऐसी ही सामग्री को भी हटाया जाए।

सोशल मीडिया कंपनियों ने जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया है। गडकरी के वकील ने यह भी अनुरोध किया है कि भविष्य में इस तरह की मानहानिजनक सामग्री को अपलोड होने से रोकने के लिए भी कदम उठाए जाएं।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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