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आयुर्वेद में अधिक नींद आने का क्या इलाज है?

नींद को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि एक औसत व्यक्ति को रोजाना सात से आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें ज्यादा सोने की समस्या…

आयुर्वेद में अधिक नींद आने का क्या इलाज है?

नींद को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि एक औसत व्यक्ति को रोजाना सात से आठ घंटे की नींद की जरूरत होती है, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें ज्यादा सोने की समस्या होती है। हाइपरसोमनिया एक विकार है जो अत्यधिक नींद की विशेषता है। व्यक्ति को अक्सर रात में लंबी नींद का अनुभव होता है और जागने में कठिनाई होती है। अन्य लक्षणों में चिंता, जलन में वृद्धि, कम ऊर्जा का स्तर, बेचैनी, धीमी विचार प्रक्रिया, भूख न लगना और चीजों को याद रखने में कठिनाई शामिल हैं।

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अधिक नींद आना या हाइपरसोमनिया (Hypersomnia) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें किसी व्यक्ति को इतनी नींद आती है कि वह दिन के समय भी जागकर नहीं बिता सकता। जो लोग हाइपरसोमनिया की समस्या से पीड़ित होते हैं वे कहीं भी सो सकते हैं। उदाहरण के लिए काम के समय और यहां तक कि ड्राइविंग आदि करते समय भी वे सो सकते हैं। उनको नींद से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे ऊर्जा में कमी और स्पष्ट रूप से सोचने में कठिनाई महसूस होना। इस समस्या से पीड़ित लोग 24 घंटे के समय में 9 घंटे से भी ज्यादा समय सोकर बिताते हैं। अधिक नींद आने की वजह से रात के समय इनकी नींद बधित नहीं होती और ये रात के समय बार-बार नहीं उठते।

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अधिक नींद आना या हाइपरसोमनिया (Hypersomnia) एक ऐसी स्थिति है, जिसमें किसी व्यक्ति को इतनी नींद आती है कि वह दिन के समय भी जागकर नहीं बिता सकता। जो लोग हाइपरसोमनिया की समस्या से पीड़ित होते हैं वे कहीं भी सो सकते हैं। उदाहरण के लिए काम के समय और यहां तक कि ड्राइविंग आदि करते समय भी वे सो सकते हैं। उनको नींद से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे ऊर्जा में कमी और स्पष्ट रूप से सोचने में कठिनाई महसूस होना। इस समस्या से पीड़ित लोग 24 घंटे के समय में 9 घंटे से भी ज्यादा समय सोकर बिताते हैं।

अधिक नींद आना या हाइपरसोमनिया

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अधिक नींद आने की वजह से रात के समय इनकी नींद बधित नहीं होती और ये रात के समय बार-बार नहीं उठते।
एकीकृत चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ अनिल पाटिल का मानना ​​है कि मानव नींद की ज़रूरतें उम्र के साथ और व्यक्तियों के बीच भिन्न हो सकती हैं - यह निर्धारित करने के लिए कोई स्थापित मानदंड नहीं है कि किसी व्यक्ति को कितनी नींद की ज़रूरत है, और नींद को पर्याप्त माना जाता है जब दिन की नींद या शिथिलता नहीं होती है .

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. यह खबर इंटरनेट से ली गयी है। इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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