बुधवार, 24 जून 2026 · नई दिल्ली
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नीट पेपर लीक: 'टुकड़े-टुकड़े' वाले बयान पर शिक्षा मंत्री पर केजरीवाल का तीखा प्रहार, जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन तेज

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर विभिन्न राज्यों से आए छात्र नीट और अन्य पेपर लीक मामलों को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान द्वारा कथित तौर पर छात्रों को 'देश के टुकड़े' करने वाला बताने पर अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने इसे अरबों का काला धंधा बताते हुए केंद्र की नीयत पर सवाल उठाए हैं।

नीट पेपर लीक: 'टुकड़े-टुकड़े' वाले बयान पर शिक्षा मंत्री पर केजरीवाल का तीखा प्रहार, जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन तेज
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के दिल जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही कथित धांधली को लेकर एक बड़ा सियासी संग्राम छिड़ गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर अब तक का सबसे तीखा प्रहार किया है। यह पूरा राजनीतिक भूचाल शिक्षा मंत्री के उस कथित बयान के बाद भड़का है, जिसमें उन्होंने प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोहों का पर्दाफाश करने की मांग कर रहे आंदोलनकारी युवाओं को 'देश के टुकड़े-टुकड़े' करने की मानसिकता वाला करार दिया था। पुलिस महकमे और प्रशासनिक अमले की भारी मौजूदगी के बीच छात्रों का यह प्रदर्शन अब एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे में तब्दील हो चुका है।

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जंतर-मंतर पर छात्रों का हुजूम और विवाद की जड़

देश के अलग-अलग राज्यों से आए हजारों परीक्षार्थी इस वक्त दिल्ली के जंतर-मंतर पर डेरा डाले हुए हैं। इन युवाओं की आंखों में अपने भविष्य को लेकर खौफ है और व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश। इनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री का तत्काल इस्तीफा और शिक्षा माफियाओं के गुप्त नेटवर्क पर सख्त कानूनी शिकंजा कसना है। विभिन्न राज्यों से दिल्ली पहुंचे इन छात्रों का कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक कि इस पूरे पेपर लीक कांड के असली सरगनाओं का पर्दाफाश नहीं हो जाता।

इसी गहमागहमी के बीच, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान की एक टिप्पणी ने सुलगती आग में घी का काम किया। आरोप है कि उन्होंने अपने वाजिब अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे इन बेबस बच्चों को राष्ट्रविरोधी तत्वों के समकक्ष खड़ा कर दिया। इस बयान के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया और विपक्षी दलों ने सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी।

'क्या छात्रों का भविष्य बर्बाद कर देश बचा रहे हैं?'

इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मोर्चा खोला। उन्होंने शिक्षा मंत्री के उक्त विवादित बयान का एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की।

'आप' संयोजक ने इस टिप्पणी को पूरी तरह से 'शर्मनाक' और एक जिम्मेदार पद की गरिमा के 'अयोग्य' करार दिया। पूर्व सीएम ने सीधा और तीखा तंज कसते हुए पूछा कि क्या परीक्षाओं में पारदर्शिता की गुहार लगा रहे ये मासूम नौजवान वाकई देश को तोड़ना चाहते हैं? उन्होंने सत्ता पक्ष की मंशा पर सवाल दागते हुए कहा कि क्या सरकार इन होनहारों का कल तबाह करके राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा कर रही है?

अरबों-खरबों का सिंडिकेट और रसूखदारों का काला खेल

मामले की तह तक जाते हुए और इसे एक बड़े संगठित अपराध के चश्मे से पेश करते हुए, केजरीवाल ने दावा किया कि पेपर लीक कोई महज प्रशासनिक चूक या इत्तेफाक नहीं है। उनके अनुसार, यह पूरी शिक्षा प्रणाली को खोखला करने वाला अरबों-खरबों रुपयों का एक बेहद सुनियोजित और संगठित काला कारोबार है।

इस अवैध धंधे के तार बहुत गहरे जुड़े हुए हैं। अंदेशा जताया गया है कि इस नेक्सस में कई सफेदपोश और बड़े रसूखदार लोग शामिल हैं, जिन पर अभी तक कानून के हाथ नहीं पहुंच पाए हैं। केजरीवाल ने आरोप लगाया कि देश में हर दो से तीन साल के अंतराल पर एक तय पैटर्न के तहत परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक किए जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में आयोजित हुई पिछली कई परीक्षाओं का हवाला दिया, जहां इसी तरह के आपराधिक सिंडिकेट ने युवाओं की वर्षों की मेहनत पर पानी फेर दिया था।

आत्महत्या के खौफनाक नतीजे और 'नीयत' पर प्रहार

हालिया नीट (NEET) परीक्षा विवाद का जिक्र करते हुए केजरीवाल ने एक बेहद दर्दनाक पहलू की ओर देश का ध्यान खींचा। उन्होंने बताया कि इस बहुचर्चित चिकित्सा प्रवेश परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और उसके बाद उपजी अनिश्चितता के कारण कई होनहार बच्चों के आत्महत्या करने के मामले सामने आए हैं।

उन्होंने इस पूरी त्रासदी के लिए केंद्र सरकार की मंशा पर सीधा प्रहार किया। केजरीवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरी तरह से 'नीयत का सवाल' है। उनके दावों के अनुसार, वर्तमान केंद्र सरकार के कार्यकाल में आयोजित होने वाली लगभग हर राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में किसी न किसी प्रकार की धांधली के सुराग मिल रहे हैं। उनका तर्क है कि जब सिस्टम में बैठे लोगों की नीयत में ही खोट हो, तो निष्पक्ष परीक्षा की उम्मीद बेमानी हो जाती है।

केजरीवाल के मुख्य आरोप और 'आप' की आगे की रणनीति

  • आंदोलन को कुचलने की साजिश: केजरीवाल का स्पष्ट आरोप है कि सत्ताधारी दल अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए प्रदर्शनकारियों को देशद्रोही बताकर पूरे आंदोलन को बदनाम और कमजोर करना चाहता है।
  • कठोरतम सजा की वकालत: मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, 'आप' नेता ने ऐसे शिक्षा माफियाओं पर देशद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज करने और इस सिंडिकेट के सरगनाओं को उम्रकैद जैसी सख्त सजा देने की पुरजोर मांग उठाई है।
  • छात्रों को पूर्ण समर्थन: आम आदमी पार्टी ने जंतर-मंतर पर न्याय की गुहार लगा रहे इन सभी परीक्षार्थियों के संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का आधिकारिक ऐलान किया है।

फिलहाल, जंतर-मंतर पर पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है और छात्रों का हुजूम लगातार अपने भविष्य को सुरक्षित करने की मांग पर अड़ा हुआ है। एक तरफ युवा न्याय की आस में सड़कों पर डटे हैं, तो दूसरी तरफ राजनीतिक बयानबाजी ने इस मुद्दे को और भी ज्यादा ज्वलंत बना दिया है। शिक्षा माफियाओं के इस कथित सिंडिकेट पर कब और कैसे निर्णायक प्रशासनिक कार्रवाई होगी, और क्या रसूखदार आरोपियों पर कभी शिकंजा कसा जा सकेगा, यह अभी जांच का विषय बना हुआ है।

DN

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