अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास पर ट्रंप का रुख़ सख़्त, बताया 'खर्चीला और शत्रुतापूर्ण'
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को "काफी हद तक" कम करने के लिए पेंटागन को निर्देश दिया है। ट्रंप ने इन अभ्यासों को न केवल…
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यासों को "काफी हद तक" कम करने के लिए पेंटागन को निर्देश दिया है। ट्रंप ने इन अभ्यासों को न केवल "खर्चीला" बताया, बल्कि उत्तर कोरिया के लिए एक अनुचित और शत्रुतापूर्ण संकेत भी करार दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने यह बयान सोशल मीडिया पर ऐसे समय में दिया है जब सियोल और वाशिंगटन अपना वार्षिक 'उल्ची फ्रीडम शील्ड' अभ्यास शुरू करने वाले हैं।
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के साथ अपने "अच्छे संबंधों" का उल्लेख करते हुए, ट्रंप ने इन अभ्यासों पर अपनी नाराज़गी व्यक्त की। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा, "किम जोंग उन के साथ मेरे बहुत अच्छे संबंधों के आधार पर मैं इस बात से खुश नहीं हूं कि अमेरिका ने बहुत पहले ही दक्षिण कोरिया के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास में भाग लेने पर सहमति जताई थी।"
अभ्यास के खर्च और संकेत पर सवाल
ट्रंप ने इन अभ्यासों की लागत और इसके कूटनीतिक प्रभाव पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "ये अभ्यास न केवल महंगे हैं, जिनका ज़्यादातर खर्च अमेरिका उठाता है (हमेशा की तरह!), बल्कि ये उस देश को पूरी तरह से अनुचित और शत्रुतापूर्ण संकेत भी देते हैं, जिसने डोनाल्ड जे. ट्रंप के राष्ट्रपति रहने के दौरान कभी कोई खतरा पैदा नहीं किया और हमेशा सम्मानजनक व्यवहार किया है।"
उन्होंने आगे बताया, "चूंकि अब इन्हें रद्द करने में बहुत देर हो चुकी है, इसलिए मैंने रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ को निर्देश दिया है कि वे संयुक्त सैन्य अभ्यास को काफी कम कर दें!" ट्रंप ने यह भी उल्लेख किया कि जब उन्होंने हाल ही में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति से ईरान को परमाणु-मुक्त करने के प्रयासों में शामिल होने के लिए कहा था, तो उन्होंने इनकार कर दिया था।
'उल्ची फ्रीडम शील्ड' अभ्यास
यह वार्षिक संयुक्त सैन्य अभ्यास 17 से 27 अगस्त तक निर्धारित है, जिसमें दक्षिण कोरिया के लगभग 18,000 सैनिक भाग लेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस अभ्यास में ड्रोन, जीपीएस जैमिंग और साइबर हमलों से निपटने जैसी आधुनिक चुनौतियों का सामना करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। उत्तर कोरिया लंबे समय से इन अभ्यासों को युद्ध की तैयारी के रूप में देखता आया है।
इनपुट: IANS



