भगवान गणेश को दूर्वा घास अर्पित करने के पीछे क्या रहस्य है ?
भगवान गणेश जी भगवान शिव के पुत्र हैं. किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है.
भगवान गणेश जी भगवान शिव के पुत्र हैं. किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है. भगवान गणेश की पूजा के दौरान उनको दूर्वा घास लाल धागे में बांधकर अर्पित की जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दूर्वा घास भगवान गणेश को अर्पित करने के पीछे एक पौराणिक कथा है.

ऐसा माना जाता है कि एक बार एक दानव अनलासुर था. इसका आतंक चारों तरफ फैला हुआ था. सभी देवता भी उससे परेशान थे. कोई भी देवता अनलासुर से युद्ध करके उसको हरा नहीं सकता था. जिसके बाद सभी देवता भगवान शिव के पास गए तथा उनसे प्रार्थना की कि दावन अनलासुर से छुटकारा दिलवाए. इसके बाद भगवान शिव ने उन्हें गणेश की पास भेजा. गणेश भगवान ने देवताओं की मद्द की. भगवान गणेश और अनलासुर का भयंकर युद्ध हुआ. इसके बाद भगवान गणेश इस दानव को निगल गया. ऐसा माना जाता है कि इसके बाद भगवान गणेश के पेट में जलन होने लगी. उसके बाद उसको कई तरह की औषधि दी गई लेकिन उनको कोई आराम नहीं मिला.

इसके बाद उनको औषधि के रूप में दूर्वा घास दी गई. जिसको खाने के बाद भगवान गणेश की जलन कम हुई. जिससे भगवान गणेश बहुत खुश हुए तथा उन्होंने कहा कि जो भी उन्हें दूर्वा घास अर्पित करेंगें उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होगीं.
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ऐसी मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा-आराधना में दूर्वा चढ़ाने से सभी तरह के सुख और संपदा में वृद्धि होती है. पूजा में दूर्वा का जोड़ा बनाकर भगवान को चढ़ाया जाता है. मान्यता है कि दूर्वा घास के 11 जोड़ों को भगवान गणेश को चढ़ाना चाहिए. दूर्वा को चढ़ाने के लिए किसी साफ जगह से ही दूर्वा घास को तोड़ना चाहिए. इससे भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं.



