बिहार में बढ़ई जाति का प्रतिशत कितना है?
बिहार में बढ़ई जाति (3-4% जनसंख्या) को अनुसूचित जाति में शामिल नहीं किया गया है, जिससे वह सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से कमजोर है। भारतीय विश्वकर्मा कारपेंटर महासभा का कहना है कि 7 अन्य राज्यों में इस समाज को SC का दर्जा दिया जा चुका है।
बिहार में बढ़ई जाति को अनुसूचित जाति में शामिल नहीं किया गया। यह रवैया इसलिए है कि इस जाति का जनसत्ता में प्रतिनिधित्व शून्य है, जिसके कारण बढ़ई जाति सामाजिक, राजनैतिक व आर्थिक सहित विभिन्न मामलों में काफी कमजोर है।भारतीय विश्वकर्मा कारपेंटर महासभा की प्रेसवार्ता में राष्ट्रीय अध्यक्ष हजारी शर्मा ने कहा कि बिहार प्रांत में बढ़ई जाति के लोगों की स्थिति काफी दयनीय है।

इसका मुख्य कारण विधानसभा व लोकसभा में उपस्थिति शून्य होना है।इस मुद्दों पर सभी लोगों को विचार करना चाहिए। श्री शर्मा ने कहा कि यह समाज राजनैतिक द़ृष्टि से पूरी तरह से पिछड़ा हुआ है। अनुग्रह नारायण शोध संस्थान पटना के द्वारा सर्वेक्षण कर रिपोर्ट बिहार सरकार को गया दिया था। शोध संस्थान द्वारा दिए गए रिपोर्ट में बढ़ई जाति को अनुसूचित जाति में शामिल करने की बात स्पष्ट लिखी हुई है।

जबकि देश के सात राज्यों में इस समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किया जा चुका है। वहीं राज्य सरकार की उदासीन रवैया के कारण वर्षा से बिहार में इस समाज को अभी तक अनुसूचित जाति में शामिल नहीं किया।आपको बता दें बिहार में बढ़ई जाती तीन से चार प्रतिशत के बीच है। बिहार में बढ़ई जाति को जो सम्मान मिलना चाहिए था अभी तक नहीं मिला है ऐसा हम नहीं बढ़ई समाज के नेता कहते हैं .



