धर्म परिवर्तन का क्या इतिहास है और ये कब से शुरू हुआ

1704
धर्म परिवर्तन
धर्म परिवर्तन

धर्म परिवर्तन एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है. जो वर्तमान में भी चर्चा का विषय बना हुआ है. जबरन धर्म-परिवर्तन पर एक धर्म के लोग दूसरे धर्म के लोगों पर आरोप लगाते रहते हैं. धर्म परिवर्तन के इतिहास के बारे में जानने से पहले यह जानना जरूरी है कि धर्म परिवर्तन होता क्या है?

धर्म

धर्म परिवर्तन- जब किसी एक धर्म के लोग किसी भी कारण से अपने धर्म को छोड़कर दूसरे धर्म के अनुयायी बन जाते हैं, तो उसको हम धर्म परिवर्तन के नाम से जानते हैं. धर्म परिवर्तन यदि अपनी सोच में आत्ममंथन द्वारा आए बदलाव के बाद किया जाता है, तो इसको गलत नहीं बताया जा सकता. लेकिन आज के सांप्रदायिकता के माहौल में धर्म परिवर्तन के भी कई कारण हो गए हैं. जैसे- जबरन धर्म परिवर्तन कराना, कोई विशेष लाभ पाने के लिए धर्म परिवर्तन करना. इस तरह के धर्म परिवर्तन को मान्यता देना सही नहीं हैं.

धर्म परिवर्तन

धर्म परिवर्तन के इतिहास की बात करें तो इसका इतिहास बहुत पुराना है. यदि हम भारत के इतिहास की बात करें तो उत्तर वैदिक काल में हिंदू धर्म में बहुत से कर्मकांड और अंधविश्वास ने जगह बना ली थी. जिसके बाद भारत में कई नए धर्म उभरकर सामने आए. अगर मुख्य धर्म की बात करें तो उस समय जैन धर्म और बौद्ध धर्म उभकर सामने आए. जिससे लोगों ने ब्राह्मणों के प्रभुत्व से छुटकारा माने के लिए बड़े स्तर पर लोग बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायी बन गए.

यह भी पढ़ें: श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर करनाल हरियाणा का इतिहास क्या है

आधुनिक भारत में भी अंग्रेज जब भारत में आए तो ईसाई धर्म के प्रचार पर ध्यान दिया जिसके कारण काफी लोगों ने अपना धर्म परिवर्तन किया. अगर हम विश्व की बात करें तो जब इस्लाम धर्म का उद्य हुआ तो वहां के शासकों ने इसके प्रचार पर बहुत ध्यान दिया और विदेशों में लोगों ने बड़े स्तर पर इस्लाम धर्म स्वीकार किया उसका कारण जो भी रहा हो प्रभावित होकर या जबरन. धर्म परिवर्तन का अपना पुराना इतिहास रहा है, लेकिन धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किए जाने का विरोध करना सही है क्योंकि यह व्यक्तिगत स्वंतत्रता का विषय है.