गुरूवार, 18 जून 2026 · नई दिल्ली
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अमेरिका और इटली ने कोरोना के सन्दर्भ में क्या नासमझी की ?

कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कोरोना के कारण दुनियाभर में तबाही मची हुई है। लाखों लोग कोरोना के संक्रमण के कारण अपनी जान गवां चुके है।

अमेरिका और इटली ने कोरोना के सन्दर्भ में क्या नासमझी की ?

कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। कोरोना के कारण दुनियाभर में तबाही मची हुई है। लाखों लोग कोरोना के संक्रमण के कारण अपनी जान गवां चुके है। अमेरिका जैसा शक्तिशाली देश भी इस वायरस के सामने बेबस नज़र आरहा है , दुनियभर में अमेरिका और इटली का हैल्थकारे सिस्टम मशहूर है उसके बाद भी इस घातक वायरस ने घुटने पर ला दिया है।

लेकिन क्या आप जानते इसके असल वजह क्या है अमेरिका और इटली ने कोरोना के सन्दर्भ में क्या नासमझी की होगी जिसका भुगतान उन्हें अब झेलना पड़ रहा है। इटली पिछले कई सालों में अपनी अर्थव्यवस्था को टूरिज्म और शॉपिंग के इर्द गिर्द ले आया था ।जिसके कारण बड़े स्तर पर टूरिस्ट आते थे। पिछले सालों में इटली एक वेडिंग डेस्टिनेशन बन गया जिसके कारण भारी पैसा इटली आता था।

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चीन से भारी मात्रा में अमीर लोग वहां शादी करने जाते थे। लगभग पूरी दुनियां ही इटली घूमने जाती थी ये सब कुछेक शहरों में ही होता था लेकिन इससे इटली सरकार भारी कमाई और लोगो को रोजगार मिलता था। आपको बताना चाहेंगे की इटली कि सरकार और वह के लोगो ने कोरोना वायरस को गंभीरता से नहीं लिया।

अगर अमेरिका की बात करे तो जैसे भारत के अमीर घूमने यूरोप और नोर्डिक देशो म जाते है और नये अमीर बने लोग थाईलैंड जाते है। वहां भी यूरोप और चीन से ही लोग कोरोना लेकर आये। चूँकि अमेरिका बना ही था व्यापार को लेकर ऐसे में समय रहते लॉकडाउन उनकी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता जो उसके लिए ठीक नहीं था।

समस्या यह थी कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता को हानि भी थी जबकि पीढियो से लोगो को स्वतंत्रता के नारे रटाये जा रहे था। पूरी दुनिया को अमेरिका लिबर्टी की बाते पढ़ता था ह्यूमन राइट्स पर प्रवचन देता था ऐसे में जनता का सहयोग नही मिला लोग कैरोना के बाद भी पार्टियां करते रहे शोपिंग चलती रही नाईट क्लब खुले रहे , उन्हें लगा वो दुनिया के सबसे ताकतवर देश में रहते है वो तो इलाज खोज ही लेगे।

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अमेरिका का फेडरल सिस्टम था जो ऐसी समस्या से लड़ने में समर्थ नहीं क्योकि इस महामारी से लड़ने के लिए पूरी सरकार को एक साथ काम करने की जरूरत थी जो नहीं हुआ। एक बड़ा कारण अमेरिकी और यूरोप के लोगो का इम्यून सिस्टम एशिया कि तुलना में कमजोर होता है वहा फ़्लू भी जानलेवा बन जाती है।

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शुरुआत में भारी मात्रा में उम्रदराज शुगर और दूसरी लाइफस्टाइल बीमारियों से ग्रसित लोगो की मौत हुई जो उनके कमजोर इम्यून सिस्टम के कारण हुई।

आर्थिक स्वार्थो को ज्यादा महत्व देना व्यक्तिगत आजादी को महत्व देना लाइफस्टाइल उनपर ही भारी पर गया और आज वह कोरोना के कारण सबसे ज्यादा तबाही मच रही है। अभी यह दोनों ही देशअपने नागरिकों को बचाने की मुहीम में जुट गए है।

Sadhna Sharma

Sadhna Sharma

साधना शर्मा News4Social की संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय खबरों और रोज़मर्रा के ताज़ा घटनाक्रम को कवर करती हैं, और मुद्दों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ध्यान देती हैं। सभी लेख देखें →

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