कॉमेडियन समय रैना की टिप्पणियों पर बढ़ा विवाद, नेताओं ने की सख्त कार्रवाई की मांग
स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना अपने एक शो में कश्मीरी पंडितों और बिहारियों को लेकर की गई कथित टिप्पणियों के कारण विवादों में घिर गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर राजनीतिक…
स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना अपने एक शो में कश्मीरी पंडितों और बिहारियों को लेकर की गई कथित टिप्पणियों के कारण विवादों में घिर गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले पर राजनीतिक दलों के नेताओं से लेकर कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कुछ ने कार्रवाई की मांग की है तो कुछ ने इसे एक कलाकार की अभिव्यक्ति के तौर पर देखने की बात कही है।
मुंबई से भाजपा विधायक राम कदम ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग सिर्फ़ प्रसिद्धि पाने के लिए जानबूझकर विवादित बयान देते हैं और बाद में माफ़ी मांग लेते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि सनातन हिंदू धर्म, देवी-देवताओं या कश्मीरी पंडितों जैसे संवेदनशील विषयों को मज़ाक का ज़रिया नहीं बनाना चाहिए। कदम ने ऐसे मामलों में सख़्त क़ानून बनाने और कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगाने की भी मांग की।
किसने क्या कहा?
भाजपा: पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने भी समय रैना की टिप्पणियों पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि कॉमेडी करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि भारत एक संवेदनशील देश है। उन्होंने कहा कि किसी भी जाति या वर्ग का उपहास करना ठीक नहीं है, खासकर कश्मी-री पंडितों का जिन्होंने बेहद मुश्किल दौर देखा है। सिंह ने चेतावनी दी कि अगर ऐसी टिप्पणियां जारी रहीं तो कोई क़ानूनी रास्ता भी अपना सकता है।
समाजवादी पार्टी: मुंबई में समाजवादी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष यूसुफ अब्राहनी ने भी ऐसी टिप्पणियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी की जाति या वर्ग का अपमान करने वाले बयानों से समाज में नफ़रत और विभाजन बढ़ता है। उन्होंने कश्मीरी पंडितों और बिहार के लोगों के प्रति सहानुभूति दिखाने की बात कही, न कि उनका मज़ाक उड़ाने की।
कलाकार की अभिव्यक्ति का सवाल
वहीं, जम्मू में एक कश्मीरी पंडित ने इस मामले पर एक अलग नज़रिया पेश किया। उन्होंने समय रैना को एक अच्छा कलाकार बताते हुए कहा कि कलाकारों का बोलने का अंदाज़ अलग होता है और उनकी बातों को लोग अलग-अलग तरीक़े से समझ सकते हैं। 1990 के दशक के विस्थापन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस पीड़ा को कोई व्यक्ति अलग ढंग से भी व्यक्त कर सकता है। हालांकि, उन्होंने रैना को राजनीतिक स्टंट से बचने की सलाह भी दी।
इनपुट: IANS



