रूस से तेल-गैस खरीदने पर अमेरिकी प्रतिबंध: भारत को डरना नहीं चाहिए, विदेश मंत्रालय राजदूत को तलब करे- पूर्व राजनयिक
अमेरिका में एक नया कानून लागू हो गया है, जो राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में पूर्व राजनयिक के.पी. फैबियन ने…
अमेरिका में एक नया कानून लागू हो गया है, जो राष्ट्रपति को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में पूर्व राजनयिक के.पी. फैबियन ने कहा है कि भारत को इस दबाव से डरना नहीं चाहिए और विदेश मंत्रालय को इस मुद्दे पर अमेरिकी राजदूत को तलब करना चाहिए।
यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुक्रवार को एक बिल पर हस्ताक्षर करने के बाद अस्तित्व में आया है। यह प्रशासन को उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है जो रूस से बड़े पैमाने पर कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस का आयात करते हैं। फैबियन के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन भारत के साथ चल रही व्यापार वार्ता में इस कानून का इस्तेमाल एक 'धमकी' के तौर पर कर सकता है, ताकि एक अंतरिम व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के लिए दबाव बनाया जा सके।
कानून के प्रावधान और लक्ष्य
अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित इस कानून का नाम 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' है। इसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए रूस के आर्थिक संसाधनों को कम करना है। यह बिल रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा कंपनियों और मॉस्को के सैन्य अभियानों में मदद करने वाली विदेशी संस्थाओं को निशाना बनाता है। हाउस ने इसे बुधवार को 262-159 वोटों से और सीनेट ने 7 अगस्त को 86-11 वोटों से पारित किया था।
किन देशों पर होगा असर?
के.पी. फैबियन ने बताया कि यह कानून मुख्य रूप से रूस से आयात करने वाले शीर्ष पांच देशों को लक्षित करता है। इन आयातों में चीन की हिस्सेदारी 50%, भारत की 37%, तुर्की की 5% और यूरोपीय संघ की 5% है। अजरबैजान और हंगरी मिलकर 3% आयात करते हैं। हालांकि, फैबियन ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून राष्ट्रपति को यह तय करने की छूट देता है कि टैरिफ लगाना है या नहीं। उन्होंने कहा, "अगर उन्हें लगता है कि किसी खास देश पर ज्यादा टैरिफ लगाने से अमेरिकी हित प्रभावित होंगे, तो वे इन्हें न लगाने का फैसला कर सकते हैं।"
चीन और भारत की प्रतिक्रिया
चीन के संदर्भ में, जो कि सबसे बड़ा आयातक है, फैबियन का मानना है कि अमेरिका शायद ही उस पर 100% टैरिफ लगाने की हिम्मत करेगा क्योंकि चीन जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की आगामी मुलाकात का भी जिक्र किया। भारत के बारे में उन्होंने अपनी राय दोहराते हुए कहा, "अब सवाल ये है कि भारत क्या प्रतिक्रिया देगा? मुझे नहीं लगता कि भारत डरेगा। विदेश मंत्रालय को इस मामले पर अमेरिकी राजदूत को तलब करना चाहिए।"
इनपुट: IANS



