शनिवार, 19 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद पर भारत के पक्ष को मज़बूती, पहलगाम हमले की निंदा एक अहम कूटनीतिक जीत: रिपोर्ट

एथेंस स्थित एक थिंक-टैंक 'डायरेक्टस' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हाल ही में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद पर अपनाया गया कड़ा रुख भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है…

ब्रिक्स घोषणापत्र में आतंकवाद पर भारत के पक्ष को मज़बूती, पहलगाम हमले की निंदा एक अहम कूटनीतिक जीत: रिपोर्ट
(फोटो: IANS)

एथेंस स्थित एक थिंक-टैंक 'डायरेक्टस' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि हाल ही में संपन्न हुए 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में आतंकवाद पर अपनाया गया कड़ा रुख भारत के लिए एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्रिक्स द्वारा आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों का विरोध करने से भारत के उस पक्ष को बल मिला है, जिसे वह दशकों से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।

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भारत की मेजबानी में हुए इस सम्मेलन के बाद जारी 'नई दिल्ली घोषणापत्र' में आतंकवाद को किसी भी राजनीतिक व्याख्या के माध्यम से वैध ठहराने की कोशिशों का खंडन किया गया। साथ ही, रणनीतिक सुविधा के आधार पर अच्छे और बुरे आतंकवादियों के बीच भेद करने की नीति को भी अस्वीकार किया गया, जो भारत के लंबे समय से चले आ रहे रुख का समर्थन करता है।

पहलगाम हमले का उल्लेख और पाकिस्तान पर दबाव

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि घोषणापत्र में 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस निंदा के साथ-साथ सीमा पार आतंकवाद, आतंकी फंडिंग और आतंकवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाहों जैसे मुद्दों को जोड़ना भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। 'डायरेक्टस' के मुताबिक, "यह संयोजन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत लगातार यह रुख रखता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को केवल राजनीतिक विवाद के नजरिए से नहीं देखा जा सकता।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि घोषणापत्र में सीधे तौर पर पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया गया है, लेकिन इस घटनाक्रम से पाकिस्तान के सामने यह असहज सवाल ज़रूर खड़ा हो गया है कि वह सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी ढांचों, संगठनों और वैचारिक नेटवर्क से खुद को कब तक अलग दिखा सकता है।

भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता

इस कूटनीतिक सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बहुआयामी विदेश नीति को भी दिया गया है। रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख है कि भारत एक ही समय में ऐसे देशों के साथ सफलतापूर्वक संबंध बनाए हुए है, जिनके बीच गहरे भू-राजनीतिक मतभेद हैं। उदाहरण के लिए, भारत क्वाड का सदस्य होने के साथ-साथ ब्रिक्स का भी एक प्रमुख सदस्य है। वह अमेरिका के साथ अपनी साझेदारी को मजबूत करते हुए रूस के साथ भी अपने ऐतिहासिक संबंधों को बनाए हुए है।

रिपोर्ट के अनुसार, "भारत ने अलग-अलग भू-राजनीतिक हित रखने वाले देशों के समूह के सामने अपनी प्रमुख सुरक्षा चिंताओं को रखा और एक सार्थक आम सहमति हासिल की।" 'डायरेक्टस' ने निष्कर्ष निकाला है कि इस घटनाक्रम से एक स्वतंत्र वैश्विक शक्ति के रूप में भारत की स्थिति और मजबूत होती है।

इनपुट: IANS

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