उज्जैन सिंहस्थ भूमि अधिग्रहण: मुआवजे में भेदभाव का आरोप, कांग्रेस ने जांच की मांग की
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक ही परियोजना के लिए अधिग्रहित की…
मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी उज्जैन में 2028 में होने वाले सिंहस्थ की तैयारियों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया विवादों में घिर गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि एक ही परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही ज़मीन के मुआवज़े में भारी भेदभाव किया जा रहा है, जिसमें भाजपा नेताओं को किसानों की तुलना में कई गुना ज़्यादा रकम दी जा रही है।
समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने एक बयान जारी कर इस मामले को उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही परियोजना के तहत भाजपा नेताओं की ज़मीन का मुआवजा तीन करोड़ रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से दिया जा रहा है, जबकि उसी इलाके के आम किसानों को महज़ 60.48 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से भुगतान हो रहा है।
मुआवजे की दर पर उठाए सवाल
कुणाल चौधरी ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में सरकार की नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा, "क्या जमीन की कीमत मिट्टी से तय होती है या भाजपा के झंडे से?" उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि सिर्फ एक मेड़ के फासले पर मौजूद दो खेतों के मुआवजे में करोड़ों का अंतर कैसे हो सकता है।
चौधरी ने इसे किसानों के अधिकारों की "खुली लूट" और भेदभाव करार दिया। उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री मोहन यादव को संबोधित करते हुए कहा, "मुख्यमंत्री मोहन यादव बताएं कि क्या मध्य प्रदेश में अब न्याय भी भाजपा की सदस्यता देखकर मिलेगा? किसानों की जमीन सस्ती और नेताओं की जमीन सोने की कैसे हो गई?"
उच्च स्तरीय जांच और समान मुआवजे की मांग
कांग्रेस नेता ने इस मामले को सिर्फ़ मुआवज़े का नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग, भाई-भतीजावाद और किसानों के साथ विश्वासघात का प्रतीक बताया है। उन्होंने मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच होनी चाहिए, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और सभी प्रभावित किसानों को एक समान दर पर मुआवजा दिया जाए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि किसान की ज़मीन पर भाजपा का 'वीआईपी रेट' नहीं चलेगा और जनता इसका हिसाब ज़रूर मांगेगी।
इनपुट: IANS



