सागर का दुर्गावती टाइगर रिजर्व बनेगा चीतों का नया घर, मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार को छोड़ेंगे
मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर अभयारण्य की सफलता के बाद अब सागर जिले का रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा बसेरा बनने…
मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापना अभियान एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है। कूनो नेशनल पार्क और गांधीसागर अभयारण्य की सफलता के बाद अब सागर जिले का रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व चीतों का तीसरा बसेरा बनने के लिए तैयार है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव बुधवार, 7 अक्टूबर को इस रिजर्व में दो चीतों को छोड़ने के साथ इस ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत करेंगे।
यह कदम राज्य में वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन को एक बड़ा बढ़ावा देने की क्षमता रखता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए चीतों को कूनो में छोड़कर भारत में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शुभारंभ किया था, जिसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए। अब इस अभियान का विस्तार मध्य प्रदेश के अन्य उपयुक्त वन क्षेत्रों में किया जा रहा है।
कैसी हैं नए घर में तैयारी?
चीतों के नए आवास के लिए रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में व्यापक इंतजाम किए गए हैं। लगभग 439 हेक्टेयर के क्षेत्र को विशेष रूप से सुरक्षित किया गया है, जहाँ आधुनिक बाड़े (बोमा) और अन्य जरूरी सुविधाएँ तैयार की गई हैं। वन विभाग ने इन चीतों की नियमित निगरानी, सुरक्षा और स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक विस्तृत व्यवस्था सुनिश्चित की है, ताकि वे नए माहौल में आसानी से ढल सकें।
प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व
रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व को नौरादेही टाइगर रिजर्व के नाम से भी जाना जाता है और यह प्रदेश का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। इसका विस्तार सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में लगभग 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है। इसे 20 सितंबर 2023 को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। यह क्षेत्र पहले से ही बाघ, तेंदुए, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे विविध वन्यजीवों का घर है और भारतीय गिद्धों जैसी संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी गति
माना जा रहा है कि चीतों की मौजूदगी से सागर और पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र में वन्यजीव पर्यटन को नई ऊँचाई मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। जब देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक यहाँ आएँगे, तो होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे, गाइड, परिवहन और हस्तशिल्प से जुड़े स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
इनपुट: IANS



