बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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मध्य प्रदेश: नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार पर गरमाई सियासत, माकपा ने सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों में हुए भ्रष्टाचार का मामला एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी पर सवाल…

मध्य प्रदेश: नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार पर गरमाई सियासत, माकपा ने सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल
(फोटो: IANS)

मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों में हुए भ्रष्टाचार का मामला एक वरिष्ठ अधिकारी के बयान के बाद राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इस भ्रष्टाचार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है और केवल नौकरशाही ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है।

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यह पूरा विवाद एक अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) रैंक के अधिकारी के वीडियो से शुरू हुआ, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वीडियो में अधिकारी ने नगरीय निकायों में खरीदी प्रक्रिया में हो रहे भ्रष्टाचार के आंकड़े पेश किए थे। वीडियो सामने आने के बाद सरकार ने कई अधिकारियों पर कार्रवाई भी की है।

माकपा ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल

माकपा के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने एक बयान में कहा कि यह वीडियो भाजपा की आंतरिक प्रतिद्वंद्विता के कारण लीक हुआ था और अब इसे दबाने व लीपापोती करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने उस अधिकारी पर भी निशाना साधा जिसने पहले कहा था कि 'अगले साल से यह हुआ तो माफ नहीं किया जाएगा' और अब कह रहे हैं कि 139 लोगों पर कार्रवाई तो हुई है, लेकिन 'सामाजिक सम्मान' के कारण उनके नाम उजागर नहीं किए जा सकते।

माकपा नेता ने सरकार के दोहरे रवैये की आलोचना करते हुए कहा, “जो भाजपा सरकार बिजली बिल देर से भरने पर सभ्य नागरिकों के घरों पर नोटिस चिपका देती है और कुर्की कर देती है, और सामान्य अपराधों में गरीबों के घरों पर बुलडोजर चला देती है, उसे भ्रष्टाचारियों की सामाजिक प्रतिष्ठा की चिंता हो रही है।” उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि यह किसकी सरकार है।

भ्रष्टाचार के आंकड़ों पर भी संदेह

सिंह ने भ्रष्टाचार की राशि को सिर्फ 250 करोड़ बताए जाने पर भी संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर 5 रुपये की फिनाइल 33 हजार रुपये में, 350 रुपये की एलईडी 11,500 रुपये में और 2 लाख की कचरा गाड़ी 6 लाख रुपये में खरीदी गई है, तो 11 हजार करोड़ की कुल खरीदी में भ्रष्टाचार सिर्फ 250 करोड़ का कैसे हो सकता है।

माकपा ने कहा कि इस मामले पर मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्री की चुप्पी संदेह पैदा करती है, क्योंकि वे जानते हैं कि “भ्रष्टाचार की इस गंगा में नौकरशाही के साथ भाजपा नेताओं और मंत्रियों ने भी डुबकी लगाई है।” पार्टी ने मांग की है कि भ्रष्टाचार से जुड़े सभी सबूत और जिन लोगों पर कार्रवाई हुई है, उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं।

इनपुट: IANS

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News4Social मध्य प्रदेश डेस्क

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