इंदौर: एडवाइजरी फर्म की आड़ में ठगी का बड़ा खुलासा, 1 करोड़ से ज्यादा रकम वाले 6 खाते मिले
मध्य प्रदेश के इंदौर में निवेशकों को सलाह देने वाली एक कंपनी की आड़ में बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 11 लोगों की पहचान की है, जिनमें से दो मुख्य आरोपियों को…
मध्य प्रदेश के इंदौर में निवेशकों को सलाह देने वाली एक कंपनी की आड़ में बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 11 लोगों की पहचान की है, जिनमें से दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पुलिस को छह ऐसे बैंक खातों का भी पता चला है, जिनमें एक करोड़ रुपये से अधिक की रकम जमा है।
मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को थाना विजयनगर क्षेत्र के प्रिंसेस स्काइप बिजनेस पार्क में चल रहे एक संदिग्ध दफ्तर की सूचना मिली। इंदौर के डीसीपी अमन राठौर ने बताया कि यह कंपनी 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' के नाम से चल रही थी, जिसे सतना निवासी शुभम शर्मा ने बनाया था। उन्होंने स्पष्ट किया, "इस कंपनी का जो लाइसेंस है, वो एडवाइजरी का है। मतलब ये लोग निवेशकों को एडवाइज कर सकते हैं कि कहां इन्वेस्टमेंट करें। स्वयं पैसा लेकर उसे इंवेस्ट करने का इनको लाइसेंस नहीं है।"
छापेमारी में दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने सबसे पहले दिलीप पांडेय नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर 'द रैपिड इन्वेस्टर्स' के कार्यालय पर छापा मारा गया। वहां से मिले सुरागों के आधार पर पुलिस ने शुभम शर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी के मुताबिक, दिलीप पांडेय निवेशकों से पैसा लेने के लिए म्यूल अकाउंट्स (संदिग्ध बैंक खाते) उपलब्ध कराता था।
पुलिस ने इस गिरोह के 11 सहयोगियों को चिह्नित किया है, जिनमें अहमद राजा, भरत भूषण, नरेश, विजेंद्र, अमित, रमनदीप, नरेंद्र और योगेश समेत अन्य लोग शामिल हैं। फिलहाल अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के दफ्तर से 20 सिम कार्ड, 17 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। पुलिस इन उपकरणों की जांच कर रही है ताकि ठगी के नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में और जानकारी जुटाई जा सके। जांच में पता चला है कि आरोपी शुरुआत में निवेशकों को कुछ मुनाफा दिखाकर उनका भरोसा जीतते थे और बाद में बताते थे कि उनका पैसा डूब गया है। पुलिस अब इन खातों के लेनदेन और पैसे के स्रोत की विस्तृत जांच कर रही है।
इनपुट: IANS



