म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में निवेशकों का भरोसा कायम, दूसरी तिमाही में AUM 14% बढ़कर ₹89.51 लाख करोड़ हुआ
बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में इंडस्ट्री की औसत संपत्ति प्रबंधन (AUM)…
बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। चालू वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में इंडस्ट्री की औसत संपत्ति प्रबंधन (AUM) सालाना आधार पर 14.1% बढ़कर 89.51 लाख करोड़ रुपए के स्तर पर पहुंच गई। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछली तिमाही की तुलना में यह 4.9% की वृद्धि दर्शाता है।
हालांकि, आईसीआरए एनालिटिक्स द्वारा बुधवार को जारी इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बाजारों में आई गिरावट के चलते मासिक स्तर पर कुछ कमी देखने को मिली। अगस्त 2026 में इंडस्ट्री का AUM 87.08 लाख करोड़ रुपए और सितंबर 2026 में 82.64 लाख करोड़ रुपए था। इसके बावजूद, सितंबर का आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 9.3% अधिक है, जो इस सेक्टर की दीर्घकालिक विकास क्षमता को रेखांकित करता है।
इक्विटी स्कीमों में दमदार निवेश, डेट फंडों से निकासी
इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में लगातार आ रहा मजबूत निवेश है। दूसरी तिमाही के दौरान इन स्कीमों में 92,293 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो) दर्ज किया गया। इसके विपरीत, डेट-ओरिएंटेड स्कीमों से निवेशकों ने 5,853 करोड़ रुपए की शुद्ध निकासी (नेट आउटफ्लो) की। हाइब्रिड स्कीमों में भी निवेश की रफ्तार थोड़ी धीमी रही। कुल मिलाकर, दूसरी तिमाही में 1.44 लाख करोड़ रुपए का नेट इनफ्लो हुआ, जो पिछली तिमाही के 2.05 लाख करोड़ रुपए से कम है। इस कमी की एक बड़ी वजह सितंबर 2026 में हुई बड़ी निकासी और डेट स्कीमों से फंड का बाहर जाना था।
SIP और नए निवेशकों से बढ़ी ताकत
इंडस्ट्री की मजबूती का एक बड़ा स्तंभ खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के प्रति उनका रुझान है। सितंबर 2026 में SIP के जरिए निवेश 32,490 करोड़ रुपए के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसी महीने 63.26 लाख नए SIP खाते भी खोले गए। कुल म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या भी बढ़कर 28.62 करोड़ हो गई है, जो निवेशकों के बढ़ते आधार का स्पष्ट संकेत है।
रिपोर्ट में इस सकारात्मक दृष्टिकोण की पुष्टि करते हुए कहा गया है, "निवेशक आधार में लगातार विस्तार और इक्विटी में मजबूत इनफ्लो, बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए एक सकारात्मक और मजबूत विकास दृष्टिकोण की पुष्टि करते हैं।" रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 27 की पहली और दूसरी तिमाही के बीच शीर्ष दस एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी काफी हद तक स्थिर बनी रही।
इनपुट: IANS



