मध्य प्रदेश: किसानों की फसल बचाने के लिए 1200 से ज़्यादा कृष्णमृगों को नए जंगलों में भेजा गया
मध्य प्रदेश में किसानों को जंगली जानवरों से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए एक बड़ी मुहिम चलाई जा रही है। इसके तहत, शाजापुर जिले से 1,236 कृष्णमृगों (काले हिरणों) को पकड़कर राज्य के दूसरे…
मध्य प्रदेश में किसानों को जंगली जानवरों से होने वाले फसल नुकसान से बचाने के लिए एक बड़ी मुहिम चलाई जा रही है। इसके तहत, शाजापुर जिले से 1,236 कृष्णमृगों (काले हिरणों) को पकड़कर राज्य के दूसरे सुरक्षित वन क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को खुद शाजापुर के रंथभंवर गांव पहुंचकर इस अभियान के दूसरे चरण का जायजा लिया।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री ने बताया कि यह अभियान किसानों की फसलों को काले हिरण और नीलगाय जैसे जानवरों से बचाने के लिए चलाया जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में 'किसान कल्याण वर्ष' मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पकड़े गए लगभग 1,236 काले हिरणों को श्योपुर के जंगलों, गांधी सागर और रानी दुर्गावती रिजर्व फॉरेस्ट में छोड़ा जा रहा है।
अफ्रीकी तकनीक और हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल
इस पूरे ऑपरेशन के लिए अफ्रीका से एक विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है, जो 'बोमा' पद्धति का उपयोग कर रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "पूरे दक्षिण एशिया में पहली बार हेलीकॉप्टर की मदद से बोमा पद्धति के आधार पर वन्यजीवों के रेस्क्यू का यह अभियान चलाया गया है।" इस तकनीक से यह सुनिश्चित किया जाता है कि जानवरों को बिना कोई चोट पहुंचाए सुरक्षित रूप से पकड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने कैमोफ्लाज्ड मचान से इस रेस्क्यू कार्य का निरीक्षण भी किया।
सुरक्षित परिवहन और भविष्य की उम्मीद
जानवरों को नए ठिकानों तक पहुंचाने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया, "इस काम के लिए 11 ट्रकों की व्यवस्था की गई है। पशु चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और पूरी सावधानी के साथ जानवरों को सुरक्षित रूप से ले जाने की यह व्यवस्था वास्तव में अद्भुत है।" उन्होंने विश्वास जताया कि इस सफल परियोजना को देखते हुए देश के अन्य राज्य और दूसरे देश भी इस पद्धति को अपना सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों और किसानों, दोनों के हितों की रक्षा करना सरकार का उद्देश्य है।
इनपुट: IANS



