मोबाइल PLI स्कीम: ₹19,000 करोड़ के प्रोत्साहन पर सरकार को मिला ₹3 लाख करोड़ का GST - अश्विनी वैष्णव
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग रणनीति, खासकर मोबाइल फोन के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम, पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने इसके आर्थिक फायदों का ब्योरा दिया है। केंद्रीय…
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग रणनीति, खासकर मोबाइल फोन के लिए प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम, पर उठे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने इसके आर्थिक फायदों का ब्योरा दिया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का जवाब देते हुए कहा है कि इस योजना ने देश के लिए बड़े पैमाने पर राजस्व और रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के माध्यम से वैष्णव ने इन आंकड़ों को साझा किया, जैसा कि समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट में बताया गया है। उनके अनुसार, मोबाइल PLI कार्यक्रम से सरकार और अर्थव्यवस्था दोनों को काफ़ी लाभ हुआ है।
स्कीम का हिसाब-किताब
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार ने इस योजना के तहत अब तक ₹19,000 करोड़ का प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया है। इसके बदले में, इस क्षेत्र से सरकार को मिले राजस्व का आंकड़ा कहीं ज़्यादा है। वैष्णव के मुताबिक, इस सेक्टर से प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) के रूप में ₹25,000 करोड़ और जीएसटी के तौर पर ₹3 लाख करोड़ का संग्रह हुआ है।
रोजगार और विदेशी निर्भरता
रोजगार के मोर्चे पर भी इस स्कीम के असर पर ज़ोर दिया गया। मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से कुल मिलाकर लगभग 25 लाख लोगों को रोज़गार मिला है, जिसमें से अकेले मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र से ही करीब 12 लाख नौकरियाँ जुड़ी हैं।
वैष्णव की यह प्रतिक्रिया ब्लूमबर्ग के उस विश्लेषण के बाद आई है, जिसमें सवाल उठाया गया था कि क्या भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में चीन जैसी सफलता और आर्थिक लाभ हासिल कर पाएगा। रिपोर्ट ने माना कि भारत स्मार्टफोन (आईफोन सहित) बनाने का एक बड़ा केंद्र बन गया है, लेकिन प्रोसेसर, मेमोरी चिप, बैटरी और कैमरा लेंस जैसे ज़रूरी पुर्जों के लिए अभी भी आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।
ब्लूमबर्ग के विश्लेषण में कहा गया कि अब लगभग हर चार में से एक आईफोन भारत में बन रहा है, लेकिन देश के भीतर 'वैल्यू एडिशन' (यानी भारत में उत्पाद की कीमत में होने वाली बढ़ोतरी) सीमित है, क्योंकि कई अहम हिस्से विदेशों से मंगाए जाते हैं। रिपोर्ट ने यह भी तर्क दिया था कि निर्माताओं को आकर्षित करने के लिए भारत शायद बहुत बड़ी सरकारी सब्सिडी खर्च कर रहा है।
इनपुट: IANS



