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तमिलनाडु: 13 साल बाद बढ़ा ऑटो का किराया, ड्राइवरों ने फैसले का स्वागत किया पर कैब सेवाओं पर रोक की मांग

तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा चालकों ने 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सरकार द्वारा मीटर किराया बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, उनकी खुशी अधूरी है क्योंकि वे अपनी आजीविका पर पड़ रहे असर के लिए…

तमिलनाडु: 13 साल बाद बढ़ा ऑटो का किराया, ड्राइवरों ने फैसले का स्वागत किया पर कैब सेवाओं पर रोक की मांग
(फोटो: IANS)

तमिलनाडु में ऑटो-रिक्शा चालकों ने 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सरकार द्वारा मीटर किराया बढ़ाने के फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, उनकी खुशी अधूरी है क्योंकि वे अपनी आजीविका पर पड़ रहे असर के लिए ऐप-आधारित कैब सेवाओं और कुछ सरकारी योजनाओं को जिम्मेदार मानते हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ड्राइवरों ने ओला और रैपिडो जैसी निजी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

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राज्य सरकार ने आखिरी बार अगस्त 2013 में ऑटो-रिक्शा के किराए में बदलाव किया था, और अब पूरे प्रदेश के लिए नई दरें लागू की गई हैं। इस बढ़ोतरी के बावजूद, कई चालकों का मानना है कि यह उनके खर्चों को पूरा करने के लिए नाकाफी है।

ड्राइवरों की प्रमुख चिंताएं

डिंडीगुल स्थित 'पलानी रेलवे स्टेशन आउटर ऑटो-रिक्शा एसोसिएशन' के सदस्य कालिदास ने ड्राइवरों की चिंताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा, "मंगलवार रात मुख्यमंत्री ने मीटर के किराये में बढ़ोतरी की घोषणा की। हालांकि, सभी ऑटो-रिक्शा चालकों को यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं लगेगी। उदाहरण के लिए, हमें अपने वाहनों के परमिट के लिए ही हर साल काफी खर्च करना पड़ता है। ऐसे हालात में, हमारे लिए अपना गुजारा करना मुश्किल हो जाता है।"

कैब सेवाओं और अन्य योजनाओं का असर

कालिदास ने बताया कि ओला और रैपिडो जैसी ऐप-आधारित सेवाओं ने उनके काम पर बहुत बुरा असर डाला है। इसके अलावा, उन्होंने 'वेट्री पयनम' (सफल यात्रा) योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलती है। उन्होंने कहा, "इस योजना ने कई ऑटो-रिक्शा चालकों की आजीविका पर बहुत बुरा असर डाला है। हमारे अपने परिवारों में भी महिलाएं हैं और हम उनकी मदद के लिए जो कुछ भी बन पड़ता है, वह करते हैं लेकिन सरकार ने शायद इस बात को नजरअंदाज कर दिया है कि हमें भी अपने परिवारों का पेट पालना होता है।"

उन्होंने यह भी शिकायत की कि मुरुगन मंदिर पर उनकी रोजी-रोटी निर्भर रही है, लेकिन अब वहां मिनी-बसें दिन में 15 से 20 चक्कर लगा रही हैं, जिसके बारे में आरटीओ में शिकायत भी दर्ज कराई गई है। कालिदास ने अंत में कहा, "अगर रैपिडो जैसी ऐप-आधारित सेवाओं पर रोक लगा दी जाए, तो इससे हमारी आजीविका को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।"

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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