सूरत डॉक्टर सुसाइड: जांच में मानसिक उत्पीड़न की पुष्टि, 4 सीनियर डॉक्टर सस्पेंड, HOD को नोटिस
गुजरात के सूरत स्थित न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। जांच में मानसिक उत्पीड़न की बात सामने आने के बाद चार सीनियर डॉक्टरों को…
गुजरात के सूरत स्थित न्यू सिविल हॉस्पिटल में एक रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में राज्य सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है। जांच में मानसिक उत्पीड़न की बात सामने आने के बाद चार सीनियर डॉक्टरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया के निर्देश पर गठित एक विशेष जांच समिति ने मात्र 24 घंटों में अपनी जांच पूरी कर ली।
यह दुखद घटना फर्स्ट ईयर के एक रेजिडेंट डॉक्टर से जुड़ी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने पैनल और फॉरेंसिक पोस्टमार्टम के आदेश दिए थे। रिपोर्ट में मानसिक उत्पीड़न की पुष्टि होने के बाद यह त्वरित कार्रवाई की गई।
जांच में हुआ रैगिंग का खुलासा
जांच समिति ने रातभर काम करते हुए फर्स्ट ईयर के 80 से अधिक जूनियर डॉक्टरों के बयान दर्ज किए। स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानसेरिया ने बताया कि हालांकि मृतक डॉक्टर के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला, लेकिन उनके सहपाठियों के बयानों से यह साफ हो गया कि सीनियर डॉक्टरों द्वारा उन्हें अक्सर परेशान और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। इसी रिपोर्ट के आधार पर चार सीनियर डॉक्टरों को निलंबित किया गया और संबंधित विभाग की विभागाध्यक्ष (HOD) व अन्य टीचिंग स्टाफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
सरकार का सख्त संदेश और छात्रों से अपील
मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार रैगिंग जैसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं करेगी और भविष्य में भी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “जूनियर डॉक्टरों का अपमान करना या उनका मानसिक उत्पीड़न करना हमारे संस्कार नहीं हैं।” उन्होंने सीनियर डॉक्टरों को अनुशासन और मानवता दिखाने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि ऐसी गतिविधियां उनका करियर बर्बाद कर सकती हैं।
पानसेरिया ने छात्रों से भी अपील की है। उन्होंने कहा, “यदि कॉलेज में किसी भी सीनियर द्वारा परेशान किया जाता है, रैगिंग की जाती है या परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जाती है तो किसी भी विद्यार्थी को घबराने या आत्महत्या जैसा कदम उठाने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में छात्र बिना डरे डीन, निदेशक या सीधे मुझसे संपर्क करें।”
स्वास्थ्य मंत्री ने मृतक डॉक्टर के पिता से फोन पर बात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और परिवार को न्याय का भरोसा दिलाया।
इनपुट: IANS



