छोटे उद्योगों को बड़ी राहत: 90 दिन में भुगतान अनिवार्य करने वाला MSME बिल लोकसभा से पास
देश के करोड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए भुगतान में होने वाली देरी एक बड़ी चुनौती रही है। इसी समस्या को दूर करने के लिए लोकसभा ने 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन)…
देश के करोड़ों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए भुगतान में होने वाली देरी एक बड़ी चुनौती रही है। इसी समस्या को दूर करने के लिए लोकसभा ने 'सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित कर दिया है। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य छोटे उद्योगों को समय पर उनका पैसा दिलाना और विवादों को तेजी से निपटाना है।
उद्योग संगठन पीएचडीसीसीआई (PHDCCI) ने इस विधेयक का स्वागत किया है। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में संगठन के सीईओ और महासचिव रणजीत मेहता ने कहा कि यह बिल MSME सेक्टर की सबसे गंभीर समस्या का समाधान करेगा, जो उन्हें समय पर भुगतान न मिलने से होती है।
भुगतान और विवाद निपटारे के नए नियम
इस विधेयक में कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं, जिनसे छोटे उद्यमियों की मुश्किलें कम होने की उम्मीद है।
भुगतान की समय-सीमा: सबसे अहम बदलाव यह है कि अब MSMEs को 90 दिनों के अंदर भुगतान करना अनिवार्य होगा। इससे उन्हें महीनों तक अपने पैसे का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सभी केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSUs) को भी छोटे उद्योगों से की गई खरीद का भुगतान 'ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम' (TReDS) के माध्यम से करना होगा।
विवादों का तेज निपटारा: अगर भुगतान को लेकर कोई विवाद होता है तो उसके लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है।
- मामला मध्यस्थता (Mediation) या आर्बिट्रेशन के लिए भेजा जा सकता है और उसका फैसला दोनों पक्षों को मानना होगा।
- अगर कोई सरकारी कंपनी आर्बिट्रेशन के फैसले को चुनौती देना चाहती है, तो उसे विवादित राशि का 75% हिस्सा पहले जमा कराना होगा।
- यदि मध्यस्थता विफल हो जाती है, तो 30 दिनों के भीतर मामला आर्बिट्रेशन में भेजा जाना चाहिए। आर्बिट्रेशन में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के अंदर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा।
- अगर कोई मामला छह महीने से ज्यादा खिंच जाता है, तो आपूर्तिकर्ता यानी MSME को तय रकम का कम से कम 50% भुगतान तुरंत करना होगा।
रणजीत मेहता के अनुसार, इन संशोधनों से देश में कारोबार करना आसान (Ease of Doing Business) होगा, क्योंकि इसमें कई प्रक्रियाओं को अपराध की श्रेणी से भी बाहर किया गया है। यह विधेयक शुक्रवार को लोकसभा में पारित हुआ था।
इनपुट: IANS



