सोना-चांदी आयात पर सरकार की कमाई बढ़ी, जानिए क्यों महंगा हुआ सोना और क्या है इसका असर
भारत में सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं के आयात पर सरकार का सीमा शुल्क संग्रह काफी बढ़ गया है। सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि 13 मई से 2 अगस्त 2024 के बीच इन धातुओं के आयात से सरकारी…
भारत में सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं के आयात पर सरकार का सीमा शुल्क संग्रह काफी बढ़ गया है। सरकार ने सोमवार को संसद में बताया कि 13 मई से 2 अगस्त 2024 के बीच इन धातुओं के आयात से सरकारी खजाने में 10,463 करोड़ रुपये आए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी हाल ही में इन धातुओं पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने के बाद दर्ज की गई है।
लोकसभा में एक लिखित प्रश्न का उत्तर देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस लगभग ढाई महीने की अवधि में अकेले सोने के आयात पर 10,040 करोड़ रुपये का सीमा शुल्क वसूला गया। इसके अलावा, चांदी पर 328 करोड़ रुपये और प्लैटिनम पर 95 करोड़ रुपये का सीमा शुल्क संग्रह हुआ।
क्यों और कितना बढ़ाया गया था आयात शुल्क?
सरकार ने 13 मई से सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया था। इसी तरह, प्लैटिनम पर यह शुल्क 6.4% से बढ़ाकर 15.4% कर दिया गया था। वित्त राज्य मंत्री के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करना था। सरकार विदेशी मुद्रा का उपयोग कच्चे तेल, उर्वरक और औद्योगिक कच्चे माल जैसी जरूरी वस्तुओं के आयात के लिए प्राथमिकता से करना चाहती है।
चौधरी ने बताया कि वैश्विक अनिश्चितताओं, जैसे पश्चिम एशिया में संघर्ष, के कारण कच्चे तेल, खाद्य और उर्वरक की कीमतें बढ़ रही थीं, जिसके चलते यह कदम उठाना पड़ा। सोने और चांदी के डोरे (अशुद्ध रूप), सिक्के और अन्य संबंधित वस्तुओं पर भी शुल्क में बदलाव किया गया था।
तस्करी पर भी कसी गई नकेल
आयात शुल्क में बढ़ोतरी के साथ ही सरकार ने तस्करी रोकने के लिए भी कार्रवाई तेज की है। केंद्रीय मंत्री ने सदन को सूचित किया कि 13 मई से 30 जून के बीच, प्रवर्तन एजेंसियों ने 161 किलोग्राम तस्करी का सोना जब्त किया है। इस सिलसिले में कुल 116 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया।
गौरतलब है कि चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है। यहां सोने का ज्यादातर आयात आभूषण उद्योग की मांग को पूरा करने के लिए होता है, जिससे देश की विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा खर्च होता है। इसी कारण नीति-निर्माता इस पर बारीकी से नजर रखते हैं।
इनपुट: IANS



