धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने का मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने विरोध रैली को सशर्त मंज़ूरी दी
पश्चिम बंगाल सरकार के सभी धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के आदेश के खिलाफ मंगलवार को होने वाली एक विरोध रैली को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सशर्त अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की…
पश्चिम बंगाल सरकार के सभी धार्मिक स्थलों से माइक्रोफोन और लाउडस्पीकर हटाने के आदेश के खिलाफ मंगलवार को होने वाली एक विरोध रैली को कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सशर्त अनुमति दे दी है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह फैसला कोलकाता पुलिस द्वारा रैली की इजाजत देने से इनकार किए जाने के बाद दिया।
यह याचिका सीपीआई (एम) नेता अब्दुल समद ने दायर की थी, जिसकी सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के बाद, अदालत ने कुछ शर्तों के साथ रैली के आयोजन को हरी झंडी दे दी।
कोर्ट की शर्तें और टिप्पणी
अदालत ने आयोजकों द्वारा प्रस्तावित रैली के रास्ते को छोटा कर दिया है। जहाँ पहले उत्तरी कोलकाता के राजाबाजार से मध्य कोलकाता की रानी राश्मोनी रोड तक रैली की अनुमति मांगी गई थी, वहीं अब इसे राजाबाजार से मौलाली तक ही सीमित कर दिया गया है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य के आदेश के मुताबिक, रैली सुबह 11 बजे शुरू होगी और इसे एक घंटे के भीतर ही समाप्त करना होगा। एक अहम शर्त यह भी है कि विरोध प्रदर्शन के दौरान किसी भी तरह के माइक्रोफोन या लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने रैली की अनुमति अंतिम समय में रद्द करने को लेकर पुलिस के रवैये पर नाराज़गी भी जताई। उन्होंने सवाल किया कि जब आवेदन 3 अगस्त को ही दे दिया गया था, तो पुलिस ने 7 अगस्त की शाम को इनकार की सूचना क्यों दी। इस पर महाधिवक्ता सुरजीत नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि आवेदन में कुछ जानकारियों का खुलासा न होने के कारण अनुमति नहीं दी गई थी।
एक और जनहित याचिका दायर
इसी मामले से जुड़ी एक अन्य जनहित याचिका भी सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रता चक्रवर्ती की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष दायर की गई। इस याचिका में राज्य सरकार के धार्मिक स्थलों से लाउडस्पीकर हटाने के आदेश को ही वापस लेने की मांग की गई है। अदालत ने याचिका स्वीकार कर ली है, हालांकि सुनवाई की तारीख अभी तय नहीं हुई है।
इनपुट: IANS



