UPI लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं, वित्त मंत्री ने राज्यसभा में अटकलों पर लगाया विराम
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि सरकार की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है। सोमवार को…
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि सरकार की यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए भुगतान करने वाले उपयोगकर्ताओं पर कोई कर या लेनदेन शुल्क लगाने की कोई योजना नहीं है। सोमवार को राज्यसभा में कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान उन्होंने यह आश्वासन दिया।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वित्त मंत्री का यह स्पष्टीकरण उन अटकलों के बीच आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि प्रस्तावित संशोधनों के बाद UPI भुगतान पर शुल्क लग सकता है। सीतारमण ने कहा कि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10ए में प्रस्तावित बदलाव केवल एक 'सक्षम प्रावधान' है और इसका भार उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जाएगा।
विधेयक को मिली संसद की मंजूरी
कराधान एवं अन्य विधियां (संशोधन) विधेयक, 2026 को राज्यसभा ने भी ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी। यह विधेयक पिछले हफ्ते ही लोकसभा से पारित हो चुका है। अब संसद की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा।
क्या है मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) का मामला?
वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) शुल्क लागू किया जाना चाहिए या नहीं, इस पर भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) की यूपीआई और सेवा संचालन समिति विचार करेगी। उन्होंने जोर देकर कहा, "अभी तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट की कोई रूपरेखा अंतिम रूप से तय नहीं की गई है।"
इससे पहले, वित्त मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा था कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) UPI लेनदेन हमेशा की तरह शुल्क-मुक्त रहेंगे। सरकार के मुताबिक, अगर भविष्य में MDR लागू होता भी है, तो यह केवल एक निश्चित सीमा से अधिक के कुछ चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर ही लागू होगा। यह दर भी डेबिट या क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले MDR से काफी कम होगी। अधिकारियों के अनुसार, दूध, सब्जी और किराने के सामान जैसी 90% से ज़्यादा रोज़मर्रा की खरीदारी पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।
इनपुट: IANS



