सन प्वाइजनिंग के ऐसे लक्षण जो आपके लिए हो सकते है गंभीर

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सन प्वाइजनिंग के ऐसे लक्षण जो आपके लिए हो सकते है गंभीर

ज्यादातर लोग अपने लाइफ में कभी न कभी सन बर्न के शिकार हो जाते हैं. लेकिन ऐसे बहुत ही कम लोग होते है जो सन प्वाइजनिंग के बारे में जानते होगें या फिर सुना होगा. कुछ लोग तो इसके बारे में जानते ही नही है और इसे अपनी निजी ज़िन्दगी में इसे गंभीरता से नहीं लेते है.


बता दें कि ये गंभीर सन बर्न का कारण होता है जो बेहद ही दर्दनाक और उलझनों से भरा होता है. सन बर्न जब सन प्वाइजनिंग की ओर बढ़ता है तो उससे पहले वह चार संकेत जरूर देता है. उस संकेत को पहचान कर तुरंत ही डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.

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आप खुद भी इन संकेत को समझ सकते हैं. इनके बारे में जान सकते है कि आप सन बर्न के शिकार हो रहे है या नही. सन बर्न अब तेजी से बढ़ रहा है. इसकी गंभीरता को भापना आसान है. चार गंभीर संकेतों है जिनसे आप सन प्वाइजनिंग के शिकार हो सकते है


सन प्वाइजनिंग के गंभीर लक्षण
फ्लू के साथ पसीना आना
यदि आपकी स्किन पर सनबर्न ज्यादा होगा तो आपके शरीर को तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा ही संघर्ष करना पड़ता है. सन बर्न स्किन पर बढ़ता जाए तो समझ लें कि ये सन प्वाइजनिंग का कारण बन रहा है. इससे आपको मुश्किल हो सकती है. शरीर जब तापमान बनाए रखने के लिए ज्यादा संघर्ष करेगा तो आपको असमान्य सा महसूस होगा. वयस्कों के शरीर का सामान्य तापमान 97 और 99 डिग्री फ़ारेनहाइट के बीच होता है जबकि बच्चों और शिशुओं का सामान्य तापमान आमतौर पर 97.9 और 100.4 डिग्री फ़ारेनहाइट के बीच होता है. यदि आपके शरीर का तापमान बहुत अधिक या कम है तो आपको फ्लू जैसे लक्षण भी दिखने लग सकते हैं. जैसे आपको ठंडा पसीना आ सकता है या आपको कपकपी फील हो सकती है.

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मिचली और बेहोशी आना
सन प्वाइजनिंग जब शरीर से इलेक्ट्रोलाइट्स को निकाल देता है तो आपके अंदर फ्लू के गंभीर लक्षण नजर आने लगते हैं. उस वक्त आपको मिचली सा महसूस होने लगता है. इतना ही नहीं सन बर्न बढ़ता है तो व्यक्ति के अंदर उलझन बढ़ती है, बेहोशी महसूस होती है, तेज ठंड लगना और मिचली के साथ उल्टी भी आने लगती है. शरीर की मासपेशियो में ऐंठन के साथ सुस्ती छाने लगती है.
बढ़ सकता है संक्रमण का खतरा
सन प्वाइजनिंग अगर स्किन पर बढ़ता जाऐ तो इससे संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. सन प्वाइजनिंग में स्किन का संक्रमण का खतरा इतना बढ़ता है कि उसमें मवाद या पानी भर जाता है, साथ ही फट चुकी स्किन की सतह से पानी आने लगता है. बिलकुल छाले की तरह और कुछ दिनों बाद उसमें सूजन और दर्द शुरू हो जाता है.
अगर आपको अपने शरीर में ऐसे बदलाव आते नजर आऐ तो आप जल्द ही अच्छे डॉक्टर से इस बात की सलाह ले सकते है. बता दें कि इन तरीकों से बचने के उपाय भी होते है ऐसे कई तरीके हैं जिनसे धूप, सन बर्न और सन प्वाइजनिंग से बचा जा सकता है. इससे बचने के कई तरीके है अगर आप सही तरीके से अपनाते है तो सन प्वाइजनिंग से बचा जा सकता है.


सन प्वाइजनिंग से बचाव के तरीके
जब भी धूप में निकलना हो तो आप घर से निकलने से करीब 30 मिनट पूर्व सनस्क्रीन लगा लें.
सन्स्क्रीन का एसपीएफ 30 या फिर इससे ऊपर होना चाहिए.जब भी आप धूप में बहार निकलते हो तो सूती कपड़े ही पहनें. अपने शरीर को पूरा ढक कर रखें, सन एक्सपोज से खुद को बचाएं. इसके लिए शरीर को कॉटन कपड़ें से कवर करके रखें.
स्किन कैंसर फाउंडेशन के अनुसार यूपीएफ को कपड़ों के जरिये भी स्किन में जाने से रोका जा सकता है. इसलिए बेहतर होगा की खुद को ऊपर से नीचे तक ढक कर रखें.
यदि आपको अधिक पसीना आता है या आप स्विमिंग करते हैं तो हर दो घंटे पर सनस्क्रीन जरूर लगाएं.
याद रखें सनस्क्रीन जब भी यूज करें उसे घर से निकलने से पहले ही लगाएं. तुरंत लगा कर धूप में निकलने से सनस्क्रीन का प्रभाव नहीं होगा