श्रीनगर: 1996 हिंसा मामले में NIA की चार्जशीट, शब्बीर शाह समेत 6 हुर्रियत नेता आरोपी
जम्मू-कश्मीर में लगभग 28 साल पुराने एक हिंसा मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एजेंसी ने 1996 में श्रीनगर में एक आतंकी के जनाजे के दौरान हुई ह
जम्मू-कश्मीर में लगभग 28 साल पुराने एक हिंसा मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, एजेंसी ने 1996 में श्रीनगर में एक आतंकी के जनाजे के दौरान हुई हिंसा को लेकर हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के छह वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। इनमें शब्बीर अहमद शाह समेत अन्य नेताओं पर भीड़ को उकसाकर पुलिस पर हमला कराने और अशांति फैलाने का आरोप है।
यह आरोप पत्र जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत में शुक्रवार को दायर किया गया। इसमें शब्बीर अहमद शाह, सैयद अली शाह गिलानी, अब्दुल गनी लोन, मोहम्मद याकूब वकील, जावेद अहमद मीर और शकील अहमद बख्शी को आरोपी बनाया गया है। हालांकि, गिलानी, लोन और वकील का निधन हो चुका है, इसलिए उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी गई है।
क्या थे आरोप और घटना?
एनआईए के मुताबिक, यह घटना 17 जुलाई 1996 की है, जब श्रीनगर के नाज़ क्रॉसिंग पर मारे गए आतंकवादी हिलाल अहमद बेग का जनाजा निकाला जा रहा था। आरोप है कि इन छह नेताओं ने एक गैर-कानूनी भीड़ का नेतृत्व किया और उसे पुलिस के खिलाफ हिंसा के लिए उकसाया। जांच में यह भी सामने आया कि जुलूस में हथियारबंद आतंकी भी शामिल थे, जिन्होंने पुलिसकर्मियों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिससे कई जवान घायल हो गए। इसके अतिरिक्त, पथराव से सरकारी वाहनों को भी भारी नुकसान पहुँचा था।
साजिश और जांच का निष्कर्ष
जांच एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि यह हिंसा एक सुनियोजित आपराधिक साजिश थी। इसका उद्देश्य आतंकी के जनाजे का इस्तेमाल अलगाववादी विचारधारा का प्रचार करने, भारत विरोधी भावनाएं भड़काने और सुरक्षा बलों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देना था। एनआईए ने पाया कि हुर्रियत नेताओं ने भीड़ को सक्रिय रूप से उकसाया और पाकिस्तान समर्थक व अलगाववादी नारे लगवाए।
इस मामले में मूल एफआईआर घटना के दिन ही श्रीनगर के शेरगढ़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। बाद में, गृह मंत्रालय के निर्देश पर अप्रैल 2024 (संपादकीय नोट: मूल स्रोत में अप्रैल 2026 दिया गया है, जो संभवतः एक टंकण त्रुटि है) में एनआईए ने जांच अपने हाथ में ले ली। आरोपियों पर रणबीर दंड संहिता (RPC), 1989 और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, हत्या के प्रयास और दंगे जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एनआईए ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है।
इनपुट: IANS



