सोमवार, 3 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप: पूर्व AAP विधायक नरेश बाल्यान को हाईकोर्ट से जमानत नहीं

आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को एक संगठित अपराध मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस मनोज जैन की अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र…

संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने का आरोप: पूर्व AAP विधायक नरेश बाल्यान को हाईकोर्ट से जमानत नहीं
(फोटो: IANS)

आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को एक संगठित अपराध मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, जस्टिस मनोज जैन की अदालत ने सोमवार को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत दर्ज इस मामले में बाल्यान की जमानत याचिका खारिज कर दी।

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बाल्यान पर कथित गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू द्वारा चलाए जा रहे एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़े होने का गंभीर आरोप है। यह पूरा मामला मुख्य रूप से बाल्यान और सांगवान के बीच हुई कथित मोबाइल बातचीत की एक ऑडियो क्लिप पर आधारित है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने इस मामले में नरेश बाल्यान समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल की है।

क्या है पूरा मामला?

इस मामले में पूर्व विधायक नरेश बाल्यान को दिसंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। उन पर मकोका जैसे कड़े कानून के तहत कार्रवाई की गई है, जिसका इस्तेमाल संगठित अपराध से निपटने के लिए किया जाता है। हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किया जाना बाल्यान के लिए एक बड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।

AAP के एक और पूर्व नेता को हुई थी उम्रकैद

हाल ही में आम आदमी पार्टी के एक अन्य पूर्व नेता को भी एक गंभीर आपराधिक मामले में सजा सुनाई गई थी। 31 जुलाई को कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में 'आप' के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा दी थी।

फरवरी 2020 में हुए दंगों के दौरान अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी और उनका शव चांदबाग के एक नाले से मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 40 से ज्यादा घाव होने की पुष्टि हुई थी। इस मामले में अदालत ने 13 जुलाई को ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या व अन्य गंभीर धाराओं में दोषी ठहराया था। दिल्ली पुलिस ने दोषियों के लिए मौत की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इस केस में कुल 11 लोगों पर मुकदमा चला था, जिनमें से छह को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।

इनपुट: IANS

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News4Social दिल्ली डेस्क

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