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डोंबिवली: अस्पताल की जांच पर गंभीर सवाल, नाबालिग की प्रेग्नेंसी रिपोर्ट तीन बार पॉजिटिव आने के बाद मचा हड़कंप

महाराष्ट्र के डोंबिवली में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) द्वारा संचालित शास्त्रीनगर अस्पताल एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला एक नाबालिग लड़की की जांच रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें…

डोंबिवली: अस्पताल की जांच पर गंभीर सवाल, नाबालिग की प्रेग्नेंसी रिपोर्ट तीन बार पॉजिटिव आने के बाद मचा हड़कंप
(फोटो: IANS)

महाराष्ट्र के डोंबिवली में कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) द्वारा संचालित शास्त्रीनगर अस्पताल एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला एक नाबालिग लड़की की जांच रिपोर्ट से जुड़ा है, जिसमें हीमोग्लोबिन की कमी का इलाज कराने आई लड़की की प्रेग्नेंसी टेस्ट रिपोर्ट तीन बार पॉजिटिव बताई गई। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, परिवार ने जब बाहर जांच कराई तो रिपोर्ट निगेटिव आई, जिसके बाद अस्पताल की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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यह घटनाक्रम तब सामने आया जब भाजपा नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने इसे उजागर करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। इस पूरे मामले के कारण लड़की और उसके परिवार को भारी मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, 30 जुलाई को एक नाबालिग लड़की अपनी मां के साथ भारी ब्लीडिंग की शिकायत लेकर शास्त्रीनगर अस्पताल पहुंची थी। डॉक्टरों ने उसे भर्ती होने की सलाह दी। भर्ती होने के बाद उसकी कुछ जांचें की गईं, जिसमें प्रेग्नेंसी टेस्ट भी शामिल था। परिवार का आरोप है कि उन्हें बताए बिना यह जांच की गई और रिपोर्ट पॉजिटिव आने की जानकारी दी गई।

परिवार का दावा है कि जब उन्हें पहली रिपोर्ट पर यकीन नहीं हुआ, तो अस्पताल ने दो बार और जांच की और दोनों ही बार नतीजा पॉजिटिव आया। इस घटना से लड़की सदमे में चली गई और करीब 24 घंटे तक रोती रही। परिवार के अनुसार, वह लगातार यही पूछ रही थी कि जब उसने कुछ गलत नहीं किया तो ऐसी रिपोर्ट क्यों आई।

बाहरी जांच में रिपोर्ट निगेटिव

अस्पताल की रिपोर्ट पर संदेह होने पर परिवार ने बाहर से प्रेग्नेंसी टेस्ट किट खरीदकर खुद जांच की, जिसमें रिपोर्ट निगेटिव आने का दावा किया गया है। अस्पताल की तीन पॉजिटिव रिपोर्ट और परिवार की निगेटिव रिपोर्ट के इस अंतर ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है। भाजपा नगरसेवक दीपेश म्हात्रे ने सवाल उठाया है कि क्या रिपोर्ट में कोई तकनीकी या मानवीय भूल हुई, या फिर जांच प्रक्रिया में ही कोई खामी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नाबालिग की जांच से पहले उसके माता-पिता को विश्वास में नहीं लिया गया।

प्रशासन ने दिए जांच के आदेश

मामला सामने आने के बाद केडीएमसी आयुक्त अभिनव गोयल ने इसे गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दीपा शुक्ला ने बताया कि मामले की पड़ताल के लिए एक समिति का गठन किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लड़की को जांच के बाद सोनोग्राफी कराने की सलाह दी गई थी। डॉ. शुक्ला ने आश्वासन दिया है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि शास्त्रीनगर अस्पताल पहले भी विवादों में रह चुका है, जब डॉक्टरों से मारपीट के मामले में शिवसेना के एक नगरसेवक रमेश म्हात्रे को तड़ीपार किया गया था।

इनपुट: IANS

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News4Social महाराष्ट्र डेस्क

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