टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग की राह मुश्किल, RBI ने खारिज की बड़ी अर्जी
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपना 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' (CIC) का…
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से एक बड़ा झटका लगा है। केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उसने अपना 'कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी' (CIC) का पंजीकरण रद्द करने की मांग की थी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले के बाद कंपनी पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की शर्त लागू रह सकती है।
दरअसल, टाटा संस को RBI ने 2022 में 'अपर-लेयर' गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया था। इस श्रेणी की कंपनियों पर बैंकों की तरह ही कड़े नियम लागू होते हैं और उन पर कड़ी निगरानी रखी जाती है। RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी टाटा संस को इसी सूची में बनाए रखा है।
लिस्टिंग से क्यों बचना चाहती है कंपनी?
टाटा संस लंबे समय से सार्वजनिक तौर पर सूचीबद्ध होने का विरोध करती रही है। कंपनी का मानना है कि लिस्टिंग के बाद उसे बहुत सी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी और नियामकीय अनुपालन की प्रक्रियाएं भी काफी बढ़ जाएंगी। इसी से बचने के लिए कंपनी ने RBI से अनुरोध किया था कि चूंकि अब वह कर्ज-मुक्त (डेट-फ्री) हो चुकी है, इसलिए उसे CIC के तौर पर पंजीकृत रहने की जरूरत नहीं है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
RBI का सख्त रुख और नए नियम
रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने पहले ही टाटा संस को सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होने की आवश्यकता के बारे में बता दिया था। चूंकि कंपनी अभी भी एक 'अपर-लेयर' NBFC मानी जा रही है, इसलिए लिस्टिंग का नियम उसके लिए बेहद अहम बना हुआ है।
इसके साथ ही, RBI ने उद्योग जगत की उस मांग को भी नहीं माना है, जिसमें बड़े NBFC के वर्गीकरण के लिए संपत्ति की सीमा बढ़ाने का सुझाव दिया गया था। इसके बजाय, केंद्रीय बैंक ने एक सरल ढांचा अपनाया है, जिसका मुख्य आधार कंपनी की बैलेंस शीट का आकार होगा। नए मानदंडों के तहत, जिन NBFC की स्वतंत्र संपत्ति 1 लाख करोड़ रुपए या उससे अधिक होगी, उन्हें बैंकों जैसी कड़ी निगरानी का सामना करना पड़ेगा, जिसमें भविष्य में लिस्टिंग की शर्त भी शामिल हो सकती है।
नेतृत्व परिवर्तन के बीच आया फैसला
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब टाटा संस नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। कंपनी के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने एक और कार्यकाल नहीं लेने का फैसला किया है, जिसके बाद उनके उत्तराधिकारी की तलाश जारी है। हाल ही में, कंपनी के इतिहास में पहली बार उसकी वार्षिक आम बैठक (AGM) को पर्याप्त कोरम न होने के कारण स्थगित करना पड़ा था।
इनपुट: IANS



