महाराष्ट्र में सूखे का संकट: शरद पवार ने सीएम फडणवीस को पत्र लिख किसानों के लिए तत्काल राहत की मांग की
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के…
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में कम बारिश के कारण सूखे जैसे हालात पैदा हो गए हैं, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, पवार ने अपने पत्र में किसानों के लिए आर्थिक सहायता, कर्जमाफी और सूखा घोषित करने समेत कई अहम कदम उठाने का आग्रह किया है।
पत्र में कहा गया है कि इस साल बारिश की कमी से सोयाबीन, कपास, बाजरा, मक्का, अरहर, मूंग और उड़द जैसी खड़ी फसलें सूख रही हैं। साथ ही, कीटों और बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है। पवार ने आशंका जताई है कि इससे खेती के साथ-साथ पीने के पानी और पशुओं के चारे का भी गंभीर संकट पैदा हो सकता है।
किसानों और खेतिहर मजदूरों के लिए सीधी मदद
शरद पवार ने मांग की है कि सरकार को औपचारिक नियमों का इंतजार किए बिना प्रभावित इलाकों में तुरंत सूखा घोषित करना चाहिए। उन्होंने किसानों को तत्काल राहत देने के लिए प्रति हेक्टेयर कम से कम 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता और खेतिहर मजदूर परिवारों को 25,000 रुपये की विशेष सहायता देने की भी मांग रखी है।
कर्जमाफी और बीमा से जुड़े अहम सुझाव
किसानों को आर्थिक संकट से उबारने के लिए, पवार ने कई वित्तीय उपायों का सुझाव दिया है। इनमें ऋण माफी योजना को तत्काल लागू करना, फसल ऋण की उपलब्धता सुनिश्चित करना और नियमित कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए प्रोत्साहन सब्सिडी को 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करना शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि 2025-26 में फसल ऋण लेने वाले और इस साल डिफॉल्टर हुए किसानों को भी इस योजना में शामिल किया जाए। इसके अतिरिक्त, एक रुपये वाली फसल बीमा योजना और पिछले साल बेमौसम बारिश से हुए नुकसान के लिए घोषित 17,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता को तुरंत वितरित करने की मांग की गई है।
बुनियादी सुविधाओं और निगरानी पर जोर
पवार ने सूखे से निपटने के लिए एक व्यापक योजना की वकालत की है। उन्होंने रोजगार गारंटी योजनाओं के तहत विशेष कार्य शुरू करने, फलों के बागों को बचाने के लिए टैंकरों की व्यवस्था करने और पीने के पानी की कमी वाले गांवों में सरकारी टैंकर शुरू करने का आग्रह किया है। पशुओं के लिए चारे के कैंप और चिकित्सा सेवाओं की भी मांग की गई है। पत्र में बिजली ट्रांसफार्मर की समय पर मरम्मत के लिए एक विशेष अभियान चलाने और स्थिति की निगरानी के लिए राज्य व जिला स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है। साथ ही, प्रभावित तालुकों में छात्रों की परीक्षा और पढ़ाई की पूरी फीस माफ करने की भी मांग रखी गई है।
इनपुट: IANS



