शुक्रवार, 14 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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दिव्यांगों पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना समेत 5 लोगों के खिलाफ FIR रद्द की

कॉमेडियन समय रैना और उनके चार साथियों को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को अदालत ने दिव्यांगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले…

दिव्यांगों पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कॉमेडियन समय रैना समेत 5 लोगों के खिलाफ FIR रद्द की
(फोटो: IANS)

कॉमेडियन समय रैना और उनके चार साथियों को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को अदालत ने दिव्यांगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़े मामले में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने यह फैसला कॉमेडियनों द्वारा पहले दिए गए निर्देशों का पालन करने के आधार पर सुनाया।

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इन कॉमेडियनों में समय रैना के अलावा विपुल गोयल, बलराज परमजीत सिंह घई, सोनाली ठक्कर और निशांत जगदीश तंवर शामिल हैं। अदालत ने उन्हें दिव्यांगों के लिए जागरूकता कार्यक्रम करने और उनके इलाज के लिए धन जुटाने का निर्देश दिया था, जिसका उन्होंने पालन किया।

क्या था पूरा विवाद?

यह मामला समय रैना के कॉमेडी शो 'इंडियाज गॉट लेटेंट' से शुरू हुआ था। शो में की गई कुछ बातों को लेकर देश के अलग-अलग हिस्सों में शिकायतें दर्ज की गईं। इसके बाद, दिव्यांग लोगों के लिए काम करने वाले संगठन 'क्योर एसएमए' ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। संगठन का आरोप था कि शो में दिव्यांगों और गंभीर शारीरिक समस्याओं वाले लोगों के बारे में ऐसी बातें कही गईं, जो उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाती हैं।

अदालत का सख्त रुख और निर्देश

मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह के मजाक पर गंभीर रुख अपनाया था। अदालत ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति का मजाक उड़ाना या उसे नीचा दिखाना सही नहीं है। इसी के चलते कोर्ट ने पहले इन पांचों कॉमेडियन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश भी दिया था और पेश न होने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

बाद में, अदालत ने उन्हें दिव्यांग लोगों की जागरूकता और इलाज के लिए काम करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा था कि वे ऐसे कार्यक्रम करें जिनमें दिव्यांगों को शामिल किया जाए और उनकी जिंदगी की मुश्किलों के साथ-साथ उनकी उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को भी लोगों के सामने लाया जाए, ताकि समाज में एक सकारात्मक सोच विकसित हो। इन निर्देशों का पालन करने के बाद ही अब अदालत ने एफआईआर रद्द कर दी है।

इनपुट: IANS

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