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राम मंदिर में CEO पद पर अयोध्या के संत क्यों नाराज़ हैं? आंदोलन की चेतावनी दी

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अयोध्या का संत समाज इस…

राम मंदिर में CEO पद पर अयोध्या के संत क्यों नाराज़ हैं? आंदोलन की चेतावनी दी
(फोटो: IANS)

अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के संचालन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, अयोध्या का संत समाज इस प्रस्तावित पद का पुरजोर विरोध कर रहा है और इसे मंदिर के "सरकारीकरण" की कोशिश बता रहा है। संतों ने चेतावनी दी है कि अगर इस नियुक्ति को रद्द नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन करेंगे।

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संतों का मानना है कि राम मंदिर का संचालन किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह नहीं, बल्कि अयोध्या की सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं के अनुसार होना चाहिए। उनका कहना है कि जब मंदिर की देखरेख के लिए एक ट्रस्ट और वरिष्ठ संतों वाली एक धार्मिक समिति पहले से ही मौजूद है, तो फिर एक सीईओ की जरूरत क्यों आन पड़ी है।

कॉर्पोरेट व्यवस्था पर आपत्ति

हनुमानगढ़ी के पुजारी देवेशाचार्य ने इस प्रक्रिया को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए सवाल उठाया, "जिस तरह से सीईओ पद के लिए आवेदन मंगाए गए और अब इंटरव्यू की प्रक्रिया शुरू होने की बात सामने आ रही है, उससे ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी बड़ी कंपनी, एजेंसी या फैक्ट्री में सीईओ की नियुक्ति की जा रही हो।" उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि जिस विश्व हिंदू परिषद ने मठ-मंदिरों को सरकारी तंत्र से मुक्त कराने की बात की थी, उसी से जुड़े लोग अब मंदिर में सीईओ की नियुक्ति को आगे बढ़ा रहे हैं।

"सरकारीकरण की कोशिश" का आरोप

कई अन्य संतों ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। महंत सीताराम दास ने इसे "पिछले दरवाजे से सरकारीकरण की कोशिश" करार दिया और कहा कि संत समाज इसे सफल नहीं होने देगा। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर किसी पद की आवश्यकता है भी, तो वैष्णव परंपरा से जुड़े किसी संत को "प्रधान सेवक" या "धर्माधिकारी" बनाया जाना चाहिए।

इसी तरह, महंत वरुण दास ने आशंका जताई कि सीईओ की नियुक्ति भविष्य में मंदिर के पूर्ण सरकारीकरण का रास्ता खोल सकती है। उन्होंने याद दिलाया कि अयोध्या के मंदिरों की अपनी एक पारंपरिक व्यवस्था है, जिसमें धर्माधिकारी, अधिकारी, पुजारी, भंडारी और कोठारी जैसे पद होते हैं, और राम मंदिर का संचालन भी इसी अनुरूप होना चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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