सोमवार, 27 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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राम मंदिर चंदा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच में फोरेंसिक और ऑडिट विशेषज्ञों को शामिल करने का दिया निर्देश

अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे और चंदे में कथित चोरी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और प्रभावी बनाने के लिए एक अहम निर्देश जारी किया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठि…

राम मंदिर चंदा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने SIT जांच में फोरेंसिक और ऑडिट विशेषज्ञों को शामिल करने का दिया निर्देश
(फोटो: IANS)

अयोध्या में श्री राम मंदिर के लिए मिले चढ़ावे और चंदे में कथित चोरी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और प्रभावी बनाने के लिए एक अहम निर्देश जारी किया है। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को आदेश दिया है कि वह अपनी टीम में एक फोरेंसिक विशेषज्ञ और ऑडिट से जुड़े जानकारों को शामिल करे। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत ने जांच की प्रगति पर दो सप्ताह के भीतर स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल करने को कहा है।

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यह मामला राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह समेत अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा दायर एक याचिका से जुड़ा है। याचिका में राम मंदिर के डोनेशन फंड के इस्तेमाल और इसमें हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

जांच के लिए नई SIT का गठन

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने उत्तर प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि मामले की जांच के लिए एक नई SIT का गठन किया गया है। याचिकाकर्ताओं के वकील वरुण सिन्हा के मुताबिक, इस टीम में इंस्पेक्टर जनरल (IG), DIG, SSP और एडिशनल SSP स्तर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हैं। राज्य सरकार ने बताया कि इस नई टीम ने जांच की पूरी जिम्मेदारी संभाल ली है।

अदालत ने क्यों दिए विशेषज्ञों को शामिल करने के निर्देश?

याचिकाकर्ता के वकील अजय कुमार राय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने जांच को और मजबूत बनाने के लिए SIT की संरचना में बदलाव का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि टीम में फोरेंसिक ऑडिट और ऑडिट अकाउंट्स के क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दान से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड और लेनदेन की जांच वैज्ञानिक और पेशेवर तरीके से हो सके। याचिकाकर्ताओं ने इस निर्देश को निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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