राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच MSME संशोधन विधेयक 2026 ध्वनिमत से पारित
सोमवार को राज्यसभा में विपक्षी दलों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार…
सोमवार को राज्यसभा में विपक्षी दलों के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने इस विधेयक को सदन के पटल पर रखा था। सदन में लगातार शोर-शराबे के कारण विधेयक पारित होने के तुरंत बाद कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
पूरे दिन राज्यसभा की कार्यवाही बाधित रही। सुबह के सत्र में हंगामे के चलते सदन को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित किया गया था। जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो विपक्षी सांसद प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग का मुद्दा उठाते हुए जोरदार नारेबाजी करने लगे। इसी शोर-शराबे के बीच विधेयक पर चर्चा शुरू की गई।
विधेयक पर चर्चा और विपक्ष का विरोध
हंगामे के दौरान कई सांसदों ने विधेयक पर अपने विचार रखे, जबकि विपक्षी सदस्य लगातार नारे लगाते रहे। कांग्रेस सांसद अजय माकन ने इस बात पर आपत्ति जताई कि विपक्ष के नेता को बोलने का अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "वह दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष, 10 वर्ष तक लोकसभा सदस्य और राज्यसभा सदस्य रह चुके हैं, लेकिन उन्होंने कभी ऐसा नहीं देखा कि विपक्ष के नेता को सदन में अपनी बात रखने की अनुमति न मिले।"
माकन ने कहा कि विधेयकों पर चर्चा का सीधा संबंध देश के युवाओं से होता है और यदि विपक्ष का नेता छात्रों का मुद्दा उठाना चाहता है तो उसे मौका मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि देश में "दो तरह की व्यवस्था चल रही है। एक व्यवस्था बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए और दूसरी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए।"
सत्ता पक्ष और उपसभापति की आपत्ति
उपसभापति हरिवंश ने अजय माकन को कई बार टोकते हुए कहा कि वे केवल विधेयक से संबंधित विषय पर ही बोलें। नेता सदन जेपी नड्डा ने भी माकन के भाषण पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उन्होंने विधेयक पर एक भी वाक्य नहीं बोला है और उनके असंबंधित बयानों को कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन नियमों की अनदेखी करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा, "अजय माकन ने अपने कृत्य से सदन की गरिमा को गिराने का काम किया है।" अंततः, नारेबाजी के बीच ही चर्चा पूरी हुई और विधेयक को पारित कर दिया गया।
इनपुट: IANS



