बूंदी की गलियों से टोक्यो यूनिवर्सिटी तक: जतिन नामा की सफलता बनी शहर के लिए प्रेरणा
राजस्थान के एक छोटे से शहर बूंदी से निकले जतिन नामा ने अपनी मेहनत और लगन से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें जापान के प्रतिष्ठित टोक्यो महानगरीय विश्वविद्यालय में असिस्टेंट…
राजस्थान के एक छोटे से शहर बूंदी से निकले जतिन नामा ने अपनी मेहनत और लगन से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्हें जापान के प्रतिष्ठित टोक्यो महानगरीय विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर (आचार्य) के पद पर नियुक्ति मिली है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जतिन सोमवार, 28 सितंबर को जापान के लिए रवाना होंगे और अगले महीने अपना पदभार ग्रहण करेंगे।
बूंदी के बालचंद पाड़ा इलाके में पले-बढ़े जतिन की यह यात्रा कई युवाओं के लिए मिसाल बन गई है। उन्होंने गुजरात के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गांधीनगर से रसायन शास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। उनकी विशेषज्ञता 'हाइड्रोजन ऊर्जा क्षेत्र' में है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है।
परिवार के संघर्ष और सहयोग की कहानी
अपनी इस कामयाबी का श्रेय जतिन पूरी तरह से अपने परिवार को देते हैं। IANS से बातचीत में उन्होंने अपने पिता नारायण नामा के संघर्ष को याद करते हुए बताया, "घर में एक ही बाइक थी और पिता मेरे लिए गाड़ी छोड़कर तीन किलोमीटर पैदल ऑफिस जाते थे।" उन्होंने यह भी बताया कि उनके भाई और भाभी ने आर्थिक रूप से काफी मदद की, जबकि उनकी पत्नी अनुराधा ने हर कदम पर उनका साथ दिया।
जतिन के पिता नारायण नामा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मेहनत से कामयाबी हासिल करने के लिए बेटे को धन्यवाद देना चाहता हूं। मुझे गर्व है कि बच्चे के साथ मेरा भी सम्मान हो रहा है।"
गर्व और विदाई की मिली-जुली भावनाएं
जतिन की पत्नी अनुराधा नामा के लिए यह पल गर्व और भावुकता से भरा है। उन्होंने कहा, "हम लोगों को इनपर गर्व है कि बूंदी जैसी जगह से उठकर आईआईटी का सफर तय किया और अब देश के बाहर जाकर वहां पढ़ाएंगे।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकारा कि उन्नति के साथ अपनों को छोड़कर जाने का दुख भी है, क्योंकि वह भी जतिन के साथ जापान जा रही हैं।
पड़ोसियों और स्थानीय लोगों में भी जतिन की इस सफलता को लेकर उत्साह है। उनके एक पड़ोसी पीयूष पाचक ने कहा, "यह हमारे साथ-साथ पूरे बूंदी के लिए गर्व का विषय है। हमारी बूंदी की गलियों में खेलने वाला जतिन जापान के बच्चों को पढ़ाएगा।"
इनपुट: IANS



