सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
अपराध

बेंगलुरु नकली दवा रैकेट: अज़रबैजान से लौटा मुख्य आरोपी एयरपोर्ट पर गिरफ्तार, SIT करेगी पूछताछ

बेंगलुरु में करोड़ों रुपये के नकली दवा रैकेट की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक बड़ी सफलता मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन बाबू को सोमवार को…

बेंगलुरु नकली दवा रैकेट: अज़रबैजान से लौटा मुख्य आरोपी एयरपोर्ट पर गिरफ्तार, SIT करेगी पूछताछ
(फोटो: IANS)

बेंगलुरु में करोड़ों रुपये के नकली दवा रैकेट की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को एक बड़ी सफलता मिली है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, मामले के मुख्य आरोपी प्रशांत रंजन बाबू को सोमवार को बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ्तार कर लिया गया। वह अज़रबैजान से भारत लौट रहा था।

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पुलिस के मुताबिक, इस नकली दवा नेटवर्क का खुलासा होने के बाद प्रशांत देश छोड़कर अज़रबैजान भाग गया था। जांच टीम ने उसे वहीं ट्रैक किया और एसआईटी के दबाव के चलते उसे भारत लौटना पड़ा। सोमवार सुबह जैसे ही वह हवाई अड्डे पर उतरा, उसे हिरासत में ले लिया गया।

पूछताछ से खुल सकते हैं कई राज़

एसआईटी प्रशांत को सोमवार को ही अदालत में पेश करेगी और आगे की जांच के लिए उसकी कस्टडी की मांग कर सकती है। जांचकर्ताओं को उम्मीद है कि प्रशांत से पूछताछ के बाद इस रैकेट के पैमाने, इसमें शामिल अन्य लोगों और यह नेटवर्क कब से चल रहा था, इस बारे में अहम जानकारी सामने आएगी। यह भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि दवाएं कहां बनाई और वितरित की जा रही थीं।

क्या है यह पूरा मामला?

यह मामला बेंगलुरु में उजागर हुए एक बड़े घोटाले से जुड़ा है, जिसमें 5 करोड़ रुपये से ज़्यादा कीमत की नकली, एक्सपायर्ड और दोबारा लेबल लगाई गईं जीवन-रक्षक दवाएं ज़ब्त की गई थीं। इनमें आईसीयू और कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं भी शामिल थीं। जांच की शुरुआत कृपा हेल्थकेयर के फार्मेसी मालिक वीरेश कुमार जैन की गिरफ्तारी से हुई थी, जिसके बाद पता चला कि यह अवैध नेटवर्क 90 से ज़्यादा अस्पतालों और क्लीनिकों को दवाएं सप्लाई करता था।

अब तक हुई कार्रवाई

मामले का खुलासा होने के बाद एसआईटी ने कर्नाटक, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और महाराष्ट्र में कई जगहों पर छापेमारी की। कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इस घोटाले से जुड़े 16 खुदरा, थोक और वितरक लाइसेंस रद्द कर दिए हैं, जबकि आठ अन्य को निलंबित किया गया है। निलंबित लाइसेंसों में फाइजर का एक सीएंडएफ (कैरीइंग एंड फॉरवर्डिंग) डिपो भी शामिल है।

स्वास्थ्य विभाग अब उन मरीज़ों का पता लगाने की कोशिश कर रहा है, जिन तक ये नकली दवाएं पहुंची थीं, ताकि उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया जा सके। विभाग ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे दवाओं की पैकेजिंग को ध्यान से देखें और अगर कोई क्यूआर कोड स्कैन नहीं होता है तो इसकी सूचना तुरंत ड्रग प्रवर्तन अधिकारियों को दें।

इनपुट: IANS

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News4Social क्राइम डेस्क

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