चुनाव आयोग पर शिवसेना (UBT) का बड़ा आरोप, 'सामना' में 13 करोड़ वोटरों को हटाने की साज़िश का दावा
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में…
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए भारतीय जनता पार्टी पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है। पार्टी के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय में दावा किया गया है कि एक सोची-समझी रणनीति के तहत महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में 13 करोड़ मतदाताओं को उनके वोटिंग के अधिकार से वंचित कर दिया गया।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह पूरा विवाद वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर गहरे मतभेदों की मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने के बाद शुरू हुआ। शिवसेना (यूबीटी) ने अपने संपादकीय में इस स्थिति को भारतीय लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया है।
संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप
पार्टी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी बातों के सामने आने के बाद लोगों में गुस्सा और राजनीतिक तनाव बढ़ा है। संपादकीय में आरोप लगाया गया, "संवैधानिक पदों का इस्तेमाल पक्षपाती तरीके से किया जा रहा है।" ठाकरे गुट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग एक स्वायत्त संस्था की तरह काम करने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है, जिससे उसकी निष्पक्षता को नुकसान पहुंचा है।
विरोध प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग
'सामना' के मुताबिक, इस विवाद के कारण देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। संपादकीय में दावा किया गया कि सप्ताहांत में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों प्रदर्शनकारी, छात्र समूह और राजनीतिक कार्यकर्ता एकत्र हुए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। मुंबई में भी मेट्रो स्टेशनों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों ने कथित चुनावी गड़बड़ियों के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया।
विपक्ष का एकजुट होना और भाजपा का बचाव
इस मुद्दे पर विपक्षी दल भी एकजुट होते दिख रहे हैं। बताया गया है कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और वामपंथी दलों से संपर्क कर 'इंडिया' गठबंधन के तहत एक संयुक्त मोर्चा बनाने का आग्रह किया है। वहीं, भाजपा प्रवक्ताओं ने इन सभी आरोपों को राजनीतिक बयानबाजी बताकर खारिज कर दिया है और चुनाव आयोग का बचाव किया है।
यह तनाव तब और बढ़ गया जब केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन ने खुलासा किया कि ज्ञानेश कुमार ने, एक वरिष्ठ नौकरशाह के तौर पर, उन्हें भाजपा में शामिल होने और लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए मनाने की कोशिश की थी, साथ ही जीतने पर केंद्रीय मंत्री पद का वादा भी किया था। संपादकीय में चेतावनी दी गई है कि जब तक संवैधानिक गरिमा बहाल नहीं होती, जनता का असंतोष सरकार के लिए चुनौती बना रहेगा।
इनपुट: IANS



