सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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दिल्ली-NCR में यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हाल ही में सामने आई यौन उत्पीड़न की गंभीर घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने इन मामलों को लेकर कानून लागू करने…

दिल्ली-NCR में यौन अपराधों पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, कानून-व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
(फोटो: IANS)

दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में हाल ही में सामने आई यौन उत्पीड़न की गंभीर घटनाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने इन मामलों को लेकर कानून लागू करने वाली एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने रजिस्ट्री को इस संबंध में एक जनहित याचिका (PIL) दर्ज करने का निर्देश दिया है।

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पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को सम्मान और बिना किसी डर के जीने का मौलिक अधिकार है। अदालत ने कहा कि इन हालिया घटनाओं को देखते हुए सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के कामकाज को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं।

चिंताजनक मामले जिनका लिया गया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने दो हालिया घटनाओं का विशेष रूप से उल्लेख किया है। इनमें से एक मामला 22 सितंबर का है, जब दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास एक पार्क में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित तौर पर गैंगरेप किया गया। पीड़िता के अनुसार, खुद को पुलिसकर्मी बताकर तीन लोगों ने उसे और उसके पुरुष मित्र को धमकाया, उनके फोन छीन लिए और बाद में दो लोगों ने उसे पार्क के एक सुनसान हिस्से में ले जाकर यौन उत्पीड़न किया। एक आरोपी आसिफ ने उसे बंदूक दिखाकर धमकाया भी था। पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गोली लगने से घायल आसिफ को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य दो आरोपियों की तलाश जारी है।

दूसरा मामला ग्रेटर नोएडा-दिल्ली रूट पर चलती स्लीपर बस में 16 साल की एक नाबालिग के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न का है। यह घटना अगस्त में सामने आई थी, जब उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली लड़की नोएडा में अपना स्टॉप चूकने के बाद बस में चढ़ी थी। आरोप है कि बस के ड्राइवर और कंडक्टर ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और उसे कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी इसका स्वतः संज्ञान ले चुका है।

सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर जोर

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि पार्क, सड़कें, बसें, मेट्रो स्टेशन और फुटब्रिज जैसी जगहों को प्रशासनिक कमियों के कारण 'हाई-रिस्क ज़ोन' (खतरे वाली जगह) नहीं बनने दिया जा सकता। पीठ के अनुसार, अपर्याप्त रोशनी, निगरानी या गश्त जैसी खामियों को दूर किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों से ठोस कार्रवाई की मांग करते हुए अपराध रोकने और कमजोर लोगों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने पर बल दिया है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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