गुरूवार, 6 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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पुरी रथ यात्रा: गुंडिचा मंदिर में विराजे महाप्रभु, 'अडापा बिजे' की पवित्र रस्म पूरी

पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हो गया है। भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने रथों से उतरकर गुंडिचा मंदिर के भीतर 'अडापा मंडप'…

पुरी रथ यात्रा: गुंडिचा मंदिर में विराजे महाप्रभु, 'अडापा बिजे' की पवित्र रस्म पूरी
(फोटो: IANS)

पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हो गया है। भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने रथों से उतरकर गुंडिचा मंदिर के भीतर 'अडापा मंडप' में विराजमान हो गए हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, 'अडापा बिजे' नामक इस पवित्र रस्म के बाद अब महाप्रभु अगले नौ दिनों तक अपने जन्मस्थान माने जाने वाले इसी मंदिर में भक्तों को दर्शन देंगे।

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यह दिव्य अनुष्ठान एक विशेष 'पहंडी' (पोंडी) जुलूस के माध्यम से पूरा किया गया, जिसमें सेवायत महाप्रभु की मूर्तियों को रथों से उतारकर मंदिर के रत्न सिंहासन तक ले गए। इस महत्वपूर्ण अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसे देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।

क्या है 'अडापा बिजे' की प्रक्रिया?

इस रस्म की जानकारी देते हुए सेवायत अजय महापात्रा ने बताया कि 'अडापा बिजे' से पहले रथों पर भगवान की सभी दैनिक नीतियां संपन्न की जाती हैं, जिनमें मंगला आरती, महास्नान और संध्या आरती शामिल हैं। उन्होंने बताया कि संध्या आरती के बाद रथों से घोड़ों को हटा दिया जाता है और नारियल के पेड़ों से बने विशेष 'चारमाल' लगाए जाते हैं। पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद ही भगवान की 'पहंडी' यात्रा शुरू होती है।

जगन्नाथ मंदिर के प्रतिहारी सेवायत नरसिंह प्रतिकार ने इस रस्म के महत्व को समझाते हुए कहा, "अडापा बिजे रथ यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है...रथ यात्रा के दिन से वे यहां नौ दिनों तक निवास करेंगे, जिसके बाद बहुड़ा यात्रा के माध्यम से श्रीमंदिर लौटेंगे।" उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न सेवायतों के आपसी तालमेल से यह सदियों पुरानी परंपरा जीवंत बनी हुई है।

सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था

लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पुलिस अधिकारी प्रतीक गीता सिंह के मुताबिक, भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) और अग्निशमन विभाग की व्यापक तैनाती की गई थी। उन्होंने बताया कि एक विशेष सुरक्षा घेरा बनाकर महाप्रभु को सुरक्षित रूप से गुंडिचा मंदिर पहुंचाया गया।

वहीं, ओडिशा के स्वास्थ्य मंत्री मुकेश महालिंग ने खुद चिकित्सा व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि भीड़ के कारण घुटन की शिकायत वाले कुछ श्रद्धालुओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अब उनकी स्थिति सामान्य है और कई को छुट्टी भी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social धर्म-संस्कृति डेस्क

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