पुलवामा हमलें के बाद आतंकियों ने दिल्ली के इन इलाकों की रेकी की थी

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NIA की जांच
NIA की जांच

14 फरवरी को घातक पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकी नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक और केंद्रीय सचिवालय जैसे प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों की रेकी की थी। सितंबर में दायर जैश-ए-मोहम्मद मामले पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में कहा गया है कि आतंकी समूह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र को निशाना बनाना चाहते थे और दिल्ली के सिविल लाइंस, बीके दत्त कॉलोनी, कश्मीरी गेट, लोधी एस्टेट, मंडी हाउस, दरियागंज के साथ-साथ गाजियाबाद जैसे क्षेत्रों में व्यापक वारदात को अंजाम देना चाहते थे।

NIA की जांच में पाकिस्तान के आतंकी गुटों के नए तौर-तरीकों का पता चला है। पहली यह की वे सब अपनी पहचान छुपाने के लिए “वर्चुअल नंबर” का इस्तेमाल करते थे क्योंकि भारत में सिम कार्ड के लिए फोटो आईडी अनिवार्य कर दी गई थी।

वर्चुअल मोबाइल नंबर एक सर्वर के माध्यम से काम करता हैं जिसके लिए यूजर अपने स्मार्टफ़ोन पर एक ऐप डाउनलोड करके साइन अप करते हैं। फिर नंबर का उपयोग व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर और ईमेल एकाउंट जैसी सेवाओं के लिए साइन अप करने के लिए किया जा सकता है।

NIA ने कथित जैश-ए-मोहम्मद सदस्य सज्जाद अहमद खान, तनवीर अहमद गनी, बिलाल अहमद मीर और मुज़फ़्फ़र अहमद भट के ख़िलाफ़ 16 सितंबर को दिल्ली की अदालत के समक्ष दायर चार्जशीट में जानकारी का खुलासा किया है। सज्जाद को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मार्च में पुरानी दिल्ली से गिरफ्तार किया था, जिसके बाद तीन और आतंकी गुर्गों को गिरफ्तार किया गया था। मामला NIA को सौंप दिया गया था।

NIA के आरोपपत्र के अनुसार, बिलाल अहमद ने एक आतंकी हमले में अगले आत्मघाती हमलावर होने की बात कबूली। 14 फरवरी को पुलवामा आत्मघाती हमलावर के वीडियो को देखने के बाद, सज्जाद ने कथित तौर पर कहा था कि अगर इस तरह के हमले की योजना थी, तो उसे आदिल की तरह फिदायीन [आत्मघाती हमलावर] माना जाना चाहिए।

15 फरवरी को बिलाल ने पुलवामा के मास्टरमाइंड मुदस्सिर अहमद से अनुरोध किया कि इंशा अल्लाह ‘[मैं अगले आत्मघाती हमले को अंजाम दूंगा]” यह सब बातें NIA ने आरोप पत्र में लिखी है।

14 फरवरी के पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड मुदस्सिर अहमद के साथ सभी चार आरोपी कथित तौर पर नियमित संपर्क में थे। 10 मार्च को जम्मू और कश्मीर के त्राल में सुरक्षा बलों की मुठभेड़ में अहमद मारा गया।

NIA की चार्जशीट में बताया गया है कि कैसे एक जैश-ए-मोहम्मद कमांडर अहमद आतंकी समूह के अन्य सदस्यों और पाकिस्तान में उसके संचालकों के संपर्क में रहा।

NIA के अनुसार, अहमद ने अपने सहयोगियों को निर्देश देने के लिए अमेरिका में मैसेजिंग सर्विस व्हाट्सएप पर पंजीकृत दो वर्चुअल मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया।

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आरोप पत्र में आगे कहा गया है कि एक अन्य प्रमुख आरोपी, पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद आतंकवादी कारी मुफ्ती यासीर, पुलवामा हमले से कुछ महीने पहले भारत में घुसपैठ किया था।

आरोप पत्र में फोन और सोशल मीडिया प्लेटफार्मों से प्राप्त एनआईए के संदेशों का उल्लेख है कि अहमद और अन्य जैश-ए-मोहम्मद सदस्यों ने पुलवामा हमले को ‘कश्मीर की ईद’ के रूप में मनाया।