पहली प्रेस कांफ्रेंस में भी सवालों पर मौनी बाबा बने रहे मोदी जी

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शुक्रवार को शायद इस देश के इतिहास का सबसे अनोखा दिन था. पिछले पांच साल से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए नजर आये और वो भी एक तरफ़ा. ‘एक तरफ़ा’ शब्द को इस्तेमाल करने का निहितार्थ यही है कि जब एक पत्रकार ने प्रधानमंत्री जी से सवाल पूछा तो उन्होंने उसे पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की तरफ लुढका दिया.

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अब देश के प्रधानमंत्री जी जोकि किसी भी रैली में बोल-बोल कर विपक्षियों के छक्के छुडा देते हैं अगर चुप रह जाएँ तो देशवासियों को थोड़ा बुरा लगना लाज़मी है, आखिर हमने हमेशा ही मोदी जी को बोलते ही सुना है, फिर चाहें वो आम को कैसे खाते हैं इस बात का जवाब हो या फिर क्लाउड की वजह से लड़ाकू विमानों का रडार के पकड़ में न आना हो.

हिंदी भाषी राज्य में अधिकतर लोगो का यह मानना है कि मोदी जी का सानी कोई नही है, और कई हद तक यह बात सत्य भी है. वाकपटुता और जिस तरह का अंदाज़ मोदी जी का किसी भी रैली के पहले दिखाई पड़ता है वो नब्बे के दशक के हीरो की याद तो दिला ही देता है. अब मसला ये है कि आखिर कल हुए प्रेस कांफ्रेंस में मोदी जी मौनी बाबा क्यों बने हुए थे?

जवाब शायद अभी न मिले. सभी को 23 मई के चुनावी नतीजों का इंतज़ार है. शायद मोदी जी को भी. लेकिन अपनी प्रेस कांफ्रेंस में अमित शाह ने पूरे आत्मविश्वास के साथ बताया की एक बार फिर सरकार तो उन्ही की बन रही है. अब कोई कुछ भी विश्लेषण कर ले लेकिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से ज्यादा तो कर नही सकता. बाकी कुल मिला-जुला कर बात ये है कि पांच साल में पहले प्रेस कांफ्रेंस हो गया, भले ही उसमे प्रधानमन्त्री जी ने कोई सवाल नही लिया.

मुद्दा तो अब ये है कि 23 मई को सरकार किसकी बन रही है, सभी की नज़रे टिकी होंगी नतीजों पर और विश्लेषण और रुझानों की बाढ़ सी आने वाली है. फिलहाल अमित शाह ने अपना आंकलन बता दिया है, आगे तो 23 तो सब पाक-साफ़ होने ही वाला है.