केजरीवाल ने कहा था- IP यूनिवर्सिटी की बढ़ी हुई फीस वापस लेंगे मगर, हजारों छात्रों की डिग्री अब भी अटकी हुई है

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इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से संबद्ध/जुड़े हुए कई कॉलेजों के द्वारा 2015 बैच में पढ़ने वाले छात्रों को बिना बताए फीस बढ़ाने के कारण, हज़ारों छात्रों की डिग्री आज भी अटकी हुई है और छात्रों का भविष्य दांव पर है। 2016 में जब IP यूनिवर्सिटी द्वारा फीस बढ़ाने के मामले ने सियासी गलियारों में तूल पकड़ा तो दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों को विश्वास दिलाते हुए बढ़ी हुई फीस वापस लेने की बात कही थी।  

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अब इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के अलग-अलग कॉलेजों में पढ़ चुके छात्रों का कहना है कि जब 2015 में उन्होंने एडमिशन लिया था तो उस वक़्त उन्होंने कॉलेज द्वारा तय फीस जमा की थी, लेकिन आज की तारीख में जब ये छात्र हो चुक कॉलेज के पास अपनी डिग्री मांगने जाते हैं तो कॉलेज उनसे कहता है कि पहले बढ़ी हुई फीस बक़ाया जमा करो, उसके बाद ही तुम्हें डिग्री मिलेगी।

इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी के एक कॉलेज से बी.बी.ए की पढ़ाई कर चुकी एक छात्रा ने नाम न बताने की शर्त पर बताया ‘मैंने 2015 में एडमिशन लिया था और ‘मेरा कोर्स तीन साल का था और अब, जब मेरे अलावा मेरे बैच के सारे स्टूडेंट पास-आउट हो चुके हैं तो डिग्री मांगने पर कॉलेज वाले कहते हैं कि डिग्री सिर्फ बढ़ी हुई फीस जमा करने की शर्त पर ही मिलेगी। वह ये भी दावा करती हैं कि IP यूनिवर्सिटी के कई कॉलेज छात्रों को परीक्षा देने सिर्फ इसलिए नहीं दे रहे क्योंकि उन्हें छात्रों से पैसे चाहिए’।

IP यूनिवर्सिटी के कॉलेजों द्वारा बढ़ाई हुई फीस के सताए हुए छात्र-छात्राएं अपना दर्द ट्विटर पर ज़ाहिर कर रहे हैं। स्मृति नाम की एक छात्र ट्विटर पर लिखती हैं कि ‘IP यूनिवर्सिटी वाले हमारी ज़िन्दगी के साथ खेल रहे हैं। वे हमारी डिग्रियों के साथ खिलौने जैसा बर्ताव कर रहे हैं। कॉलेज वाले लगातार हमें धमकी दे रहे हैं कि बक़ाया फीस जमा नहीं की तो वे हमें डिग्री नहीं देंगे। कॉलेज वालों की ये मांग पूर्ण रूप से ग़लत और निराधार है’।

राहुल तिवारी नाम के एक टविटर यूज़र ने सीएम केजरीवाल, केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावडेकर व मानव संसाधन मंत्रालय को टैग करते हुए लिखा कि ‘बड़ी संख्या में IP यूनिवर्सिटी के छात्र अन्यायपूर्ण तरीके से बढ़ाई गई फीस का विरोध कर रहे हैं, लेकिन आप लोग सिर्फ राजनीतिक ट्वीट की प्रतिक्रिया सिर्फ अपने फायदे के लिए देते हैं’।

नाम न ज़ाहिर करने के वादे पर एक छात्र ने हमें बढ़ाई हुई फिस के कई काग़ज़ात भेजे। इस दौरान उन्होंने अपनी पीड़ा को कुछ शब्दों में बयां करते हुए हमें लिखा कि ‘जब से सूरजमल कॉलेज ने मुझे बकाया के लिए नोटिस भेजा है, तब से मैं 24 घंटे और सातों दिन काम कर रहा हूं और मुझे ये भी पता चला कि यह नोटिस मुझे ही नहीं, बल्कि हज़ारों छात्रों को भेजा गया है’।

हालांकि इस फीस बढ़ाने के मामले पर इन्द्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी का कहना है कि कॉलेजों की फीस बढ़ाने का आधार 2013 की ‘दिल्ली स्टेट फी रेगूलेटिंग कमेटी’ की सिफारिश है।