बुधवार, 29 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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पेट्रोल में एथेनॉल: जानें कैसे यह मिश्रण भारत की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए बन रहा है अहम

पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण सिर्फ़ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी…

पेट्रोल में एथेनॉल: जानें कैसे यह मिश्रण भारत की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए बन रहा है अहम
(फोटो: IANS)

पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण सिर्फ़ एक तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी (आईआईपीई), विशाखापत्तनम के निदेशक शालिवाहन श्रीवास्तव के अनुसार, पेट्रोल में मिलाया गया एथेनॉल का हर लीटर, आयात होने वाले कच्चे तेल के एक लीटर की जगह लेता है। इससे न सिर्फ़ कच्चे तेल पर देश की निर्भरता घटती है, बल्कि घरेलू स्तर पर बने नवीकरणीय ईंधन को भी बढ़ावा मिलता है।

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समाचार एजेंसी IANS के साथ एक विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाएं पैदा करता है, ग्रामीण इलाकों में रोजगार बढ़ाता है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करता है। श्रीवास्तव के मुताबिक, हर लीटर एथेनॉल देश की अर्थव्यवस्था के भीतर ज़्यादा मूल्य बनाए रखता है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करता है।

क्या एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल सुरक्षित है?

शालिवाहन श्रीवास्तव ने इस चिंता को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को बिना किसी पुख्ता जांच के लागू नहीं किया गया है। इसे बाज़ार में लाने से पहले नीति आयोग, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) जैसी शीर्ष संस्थाओं ने इसका व्यापक तकनीकी मूल्यांकन किया। इस जांच में इंजन की मजबूती, जंग लगने की आशंका, विभिन्न पुर्जों के साथ अनुकूलता और गाड़ी के प्रदर्शन जैसे सभी पहलुओं को गहराई से परखा गया।

भारत में एथेनॉल मिश्रण का सफ़र

श्रीवास्तव ने बताया कि भारत के लिए यह कोई नई तकनीक नहीं है। देश में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम 2001 में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ था। इसके बाद 2006 में E5 (5% एथेनॉल) को मंज़ूरी दी गई। हालांकि, 2013-14 तक यह मिश्रण सिर्फ़ 1.5% के स्तर पर ही था। बाद में उत्पादन क्षमता और बुनियादी ढांचा विकसित होने पर सरकार ने इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया। उन्होंने यह भी बताया कि ब्राज़ील जैसे कई देश दशकों से इससे भी ज़्यादा एथेनॉल वाला ईंधन सफलतापूर्वक इस्तेमाल कर रहे हैं।

भारत में आज रोज़ाना लगभग 8 करोड़ गाड़ियां पेट्रोल पंपों पर आती हैं, जिनमें करीब 80% पेट्रोल वाहन हैं। पिछले साढ़े तीन साल से E15 (15% एथेनॉल) या उससे ज़्यादा का ईंधन इस्तेमाल हो रहा है, जबकि E19 और E20 भी ढाई साल से बाज़ार में उपलब्ध हैं। इस व्यापक उपयोग ने साबित कर दिया है कि यह ईंधन पूरी तरह व्यावहारिक और सुरक्षित है।

भविष्य के लिए क्यों है ज़रूरी?

निदेशक के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता अभियान का एक अहम हिस्सा है। इसके कई सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं, जैसे विदेशी मुद्रा की बचत, किसानों की आय में बढ़ोतरी और एक स्वच्छ पर्यावरण। यह पहल आने वाले वर्षों में भारत के सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों को पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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