बॉम्बे HC की सख्त टिप्पणी: सरकारी पैसे से पटाखों के खिलाफ प्रचार न करें सेलिब्रिटी
मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पटाखों के खिलाफ चलाए जाने वाले जन-जागरूकता अभियानों के लिए सेलिब्रिटीज…
मुंबई में बढ़ते वायु प्रदूषण और पटाखों के इस्तेमाल को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि पटाखों के खिलाफ चलाए जाने वाले जन-जागरूकता अभियानों के लिए सेलिब्रिटीज को सरकारी खजाने से भुगतान नहीं किया जाना चाहिए। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत का मानना है कि ऐसे सामाजिक कार्यों में उन्हें अपनी इच्छा से मुफ्त में हिस्सा लेना चाहिए।
जस्टिस कुलकर्णी की बेंच ने सोमवार को इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि सेलिब्रिटी ऐसे अभियानों के लिए मोटी फीस वसूलते हैं। कोर्ट ने कहा, "सेलिब्रिटीज को मुंबई से काफी फायदा मिला है, इसलिए अगर वे इस शहर को अपना मानते हैं, तो उन्हें भी शहर के लिए कुछ करना चाहिए।"
सामाजिक जिम्मेदारी की याद दिलाई
अदालत ने सवाल उठाया कि जो सेलिब्रिटी मुंबई पुलिस के सालाना कार्यक्रमों में शामिल हो सकते हैं, वे किसी सामाजिक कार्य के लिए 15 मिनट का समय क्यों नहीं निकाल सकते? बेंच ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अगर कोई सेलिब्रिटी बिना पैसे लिए इन अभियानों से जुड़ने को तैयार नहीं है, तो उनसे संपर्क ही नहीं किया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया कि जरूरत पड़ने पर मराठी कलाकारों से भी मुफ्त में मदद ली जा सकती है।
जब राज्य सरकार के वकीलों ने बताया कि कुछ बॉलीवुड सितारे पहले ही इंस्टाग्राम पर पटाखे न जलाने की अपील कर चुके हैं, तो कोर्ट ने कहा कि उन्हें इसी तरह आधिकारिक अभियानों के लिए भी बिना किसी फीस के आगे आना चाहिए।
प्रशासन के प्रयासों की सराहना
हालांकि, अदालत ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) द्वारा उठाए गए कदमों की प्रशंसा की। इन कदमों में अखबार, टीवी, रेडियो और सोशल मीडिया पर विज्ञापन देना, स्कूलों में बच्चों को शपथ दिलाना और शिकायत के लिए हेल्पलाइन नंबर (1916) जारी करना शामिल है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह अभियान सिर्फ एक दिन के लिए न होकर लगातार चलना चाहिए, खासकर झुग्गी-बस्ती वाले इलाकों में, जहां स्थानीय लोगों और कॉर्पोरेटरों की मदद से विशेष जागरूकता फैलाई जानी चाहिए।
बेंच ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कुछ इलाकों में देर रात 2 बजे तक पटाखे फोड़े जाते हैं, जिससे वायु और ध्वनि प्रदूषण दोनों बढ़ता है। कोर्ट ने प्रशासन को दीपावली और अन्य त्योहारों के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
इनपुट: IANS



